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क्रेडिट कार्ड से भरते हैं रेंट? ये गलती पड़ सकती है भारी

अगर आप भी क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट करते हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। दरअसल, कई लोग ऐसे हैं जो रेंट का भुगतान अपने क्रेडिट कार्ड से कर देते हैं फिर बाद में मुसीबत में फंस जाते हैं।

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Credit Card rent

आज के समय में क्रेडिट कार्ड (Credit Card) हमारी जिंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुका है। शॉपिंग करनी हो, बिजली का बिल भरना हो या अचानक पैसों की जरूरत पड़े, क्रेडिट कार्ड हमेशा हमारे काम आता है। पिछले कुछ समय से नौकरीपेशा लोगों के बीच क्रेडिट कार्ड के जरिए अपने घर या दुकान का किराया (Rent) देने का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट करने की सुविधा देने वाले कई मोबाइल ऐप्स भी मार्केट में आ गए हैं। सुनने में यह सुविधा बहुत अच्छी और फायदेमंद लगती है क्योंकि इससे जेब में कैश न होने पर भी समय से किराया चुकाया जा सकता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ सकती है? आइए समझते हैं इसके पीछे के छिपे हुए बड़े नुकसानों को।

क्रेडिट कार्ड से किराया चुकाने का सबसे बड़ा नुकसान इस पर लगने वाली प्रोसेसिंग फीस और एक्स्ट्रा चार्ज हैं। जब भी आप किसी क्रेड (Cred), पेटीएम या नोब्रोकर जैसे ऐप के जरिए क्रेडिट कार्ड से मकान मालिक को रेंट ट्रांसफर करते हैं, तो ये थर्ड-पार्टी ऐप्स आपसे 1 से 2 फीसदी तक की मोटी कन्वीनियंस या प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं। इसके अलावा, इस फीस पर 18% जीएसटी (GST) अलग से देना होता है। इतना ही नहीं, लगभग सभी बड़े बैंकों (जैसे SBI, ICICI, HDFC) ने अब क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट करने पर ₹99 से लेकर कुल रकम का 1% तक अतिरिक्त रेंट ट्रांजैक्शन चार्ज लगाना शुरू कर दिया है। इसका मतलब है कि सिर्फ किराया चुकाने के लिए ही आप हर महीने सैकड़ों रुपये फालतू खर्च कर रहे हैं।

बैंकों ने खत्म किए रिवॉर्ड पॉइंट्स के फायदे

शुरुआत में जब लोगों ने क्रेडिट कार्ड से रेंट देना शुरू किया था, तो उन्हें इसके बदले ढेर सारे रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और मीलस्टोन बेनिफिट्स मिलते थे। लोग सोचते थे कि किराया तो देना ही है, क्यों न कार्ड से देकर फ्री में पॉइंट्स कमा लिए जाएं। लेकिन अब बैंकों ने इस लूपहोल को पूरी तरह बंद कर दिया है। अब ज्यादातर बैंक क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट करने पर कोई भी रिवॉर्ड पॉइंट या कैशबैक नहीं देते हैं। यानी जो फायदा पहले मिलता था, वह अब पूरी तरह खत्म हो चुका है और अब ग्राहकों के हिस्से में सिर्फ एक्स्ट्रा फीस और चार्ज ही बचते हैं।

कर्ज के जाल और क्रेडिट स्कोर का बड़ा खतरा

क्रेडिट कार्ड से रेंट देने का एक और बड़ा और छुपा हुआ खतरा है 'क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो' (CUR) का बढ़ना। आमतौर पर घर का किराया एक बड़ी रकम होती है। जब आप हर महीने कार्ड से इतनी बड़ी रकम स्वाइप करते हैं, तो आपकी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। अगर यह खर्च आपकी कुल लिमिट के 30% से ज्यादा हो जाता है, तो सिबिल (CIBIL) इसे निगेटिव मानता है और आपका क्रेडिट स्कोर खराब होने लगता है। इसके अलावा, अगर आप किसी महीने क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर नहीं चुका पाते हैं, तो आपको बचे हुए अमाउंट पर 36% से 42% सालाना की दर से भारी-भरकम ब्याज और लेट फीस देनी पड़ती है, जो आपको कर्ज के गहरे जाल में फंसा सकती है।

कब और कैसे करें इस सुविधा का इस्तेमाल?

वित्तीय जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट करने की सुविधा को एक नियमित आदत नहीं बनाना चाहिए। इसका इस्तेमाल केवल आपातकालीन स्थितियों (Emergency) में ही किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि किसी महीने आपकी सैलरी में देरी हो गई है या आपके पास कैश की भारी किल्लत है और मकान मालिक को समय पर किराया देना बेहद जरूरी है, तो आप इस विकल्प को चुन सकते हैं। लेकिन जैसे ही अगले महीने आपके पास पैसे आएं, सबसे पहले क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल चुकाएं। समझदारी इसी में है कि सामान्य दिनों में सीधे बैंक ट्रांसफर (UPI, NEFT) के जरिए ही किराया दें ताकि आप इन सभी छिपे हुए फालतू खर्चों से बच सकें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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