Stocks Market Investment Tips : जब किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं, तो उसके नतीजे देखते हैं। यह अच्छी बात है। एक सचेत निवेशक के तौर पर कंपनी की वित्तीय स्थिति को जरूर देखना चाहिए। लेकिन, सिर्फ प्रॉफिट और लॉस (
देविना मेहरा के मुताबिक किसी कंपनी को समझने के लिए सिर्फ प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट यानी P&L देखना काफी नहीं है। कई बार कंपनी की असली कहानी उसकी बैलेंस शीट (Balance Sheet) और कैश फ्लो (Cash Flow) में छिपी होती है। यही वजह है कि किसी कंपनी का प्रॉफिट तेजी से बढ़ रहा हो, फिर भी निवेशक के लिए यह जरूरी है कि वह देखे कि यह प्रॉफिट कैश में बदल भी रहा है या नहीं।
P&L मजबूत, फिर कहां हो सकता है खतरा?
P&L Statement किसी खास अवधि में कंपनी की कमाई और खर्च का हिसाब बताता है। इसमें रेवेन्यू से लेकर नेट प्रॉफिट तक की तस्वीर सामने आती है। लेकिन, समस्या यह है कि प्रॉफिट और कैश एक ही चीज नहीं हैं। मान लीजिए किसी कंपनी ने एक ग्राहक को 100 करोड़ रुपये का माल बेच दिया। ग्राहक को भुगतान के लिए 90 दिन का समय दिया गया। कंपनी बिक्री को रेवेन्यू के तौर पर दर्ज कर सकती है और उसका प्रॉफिट भी बढ़ सकता है। लेकिन कंपनी के बैंक खाते में अभी 100 करोड़ रुपये आए ही नहीं हैं। यानी P&L पर बिक्री और प्रॉफिट दिखाई दे रहा है, लेकिन हकीकत कैश फ्लो दिखाता है।
लंबा क्रेडिट पीरियड क्यों खतरे का संकेत?
कंपनी के P&L में भले ही सब अच्छा दिख रहा हो, लेकिन फाइनेंशियल स्टेटमेंट की हकीकत बैलेंस शीट और कैश फ्लो में छिपी है, जो कंपनी के रिसीवेबल यानी ग्राहकों से मिलने वाले पैसे की जानकारी देती है। मान लीजिए कंपनी सामान्य तौर पर ग्राहकों से 30 दिन में भुगतान लेती है। लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद वह नए ग्राहकों को 60 दिन, 90 दिन या उससे भी ज्यादा का क्रेडिट पीरियड देने लगे।
इससे बिक्री बढ़ सकती है। P&L में रेवेन्यू भी बढ़ेगा और प्रॉफिट भी अच्छा दिखाई दे सकता है। लेकिन, ये कंपनी के लिए संकट बढ़ाता है। क्योंकि, कंपनी पैसा अभी बाजार में फंसा हुआ है। अगर यह स्थिति लगातार बनी रहती है, तो कंपनी के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो सकता है।
प्रॉफिट बढ़ रहा है, कैश क्यों नहीं आ रहा?
एक निवेशक के लिहाज से यह बड़ा सवाल होना चाहिए। एक अच्छी कंपनी के मामले में आम तौर पर यह उम्मीद की जाती है कि समय के साथ उसका कैश फ्लो मजबूत होगा। लेकिन, अगर प्रॉफिट बढ़ रहा है और कैश फ्लो कमजोर है, तो निवेशक को उसे समझे बिना निवेश से बचना चाहिए।
बैलेंस शीट में कर्ज को जरूर समझें
किसी कंपनी के लिए कर्ज (Debt) बढ़ना अपने आप में कोई समस्या नहीं है। कंपनियां विस्तार के लिए या दूसरे प्रोडक्टिव एसेट्स के लिए कर्ज ले सकती हैं। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि कर्ज लेकर पैसा कहां लगाया जा रहा है और उससे कंपनी की कमाई कितनी बढ़ रही है। अगर कर्ज के साथ कंपनी का बिजनेस और कैश फ्लो नहीं बढ़ रहा है, तो यह एक चेतावनी का संकेत है कि कंपनी में कुछ बड़ी गड़बडी है।
तीन चीजें एक साथ देखें
देविना मेहरा के मुताबिक एक निवेशक को किसी कंपनी में निवेश से पहले उसका P&L, बैलेंंस शीट और कैश फ्लो एक साथ देखना चाहिए। P&L बताता है कि कंपनी ने कितना कमाया। Balance Sheet बताती है कि कंपनी के पास क्या है, कितना पैसा बकाया है और उस पर कितना कर्ज है। Cash Flow Statement बताता है कि कारोबार में वास्तव में Cash कैसे आया और कहां गया।
