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Home Loan की EMI लेट न करें? क्रेडिट स्कोर और जेब पर लगेगा डबल झटका, जानें कैसे?

आज के समय में होम लोन लिए बिना घर खरीदना मुश्किल है। अगर आप भी होम लोन लिए हैं तो समय पर ईएमआई का भुगतान जरूर करें। ऐसा नहीं करने पर आपका क्रेडिट स्कोर खराब होता है। साथ ही पेनल्टी देना होता है। इतना ही नहीं, 3 ईएमआई मिस करने पर आपका अकाउंट एनपीए में चला जाता है।

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होम लोन ईएमआई

आसमान छूती प्रॉपर्टी की कीमत ने घर खरीदना मुश्किल कर दिया है। हालांकि, इसके बावजूद लोग अपने आशियाने के सपने को पूरा कर रहे हैं। इसमें होम लोन उनकी मदद कर रहा है। आज के समय में बैंक आसानी से होम लोन दे रहे हैं। हालांकि, आसानी से होम लोन मिल जाना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। कई लोग अपनी चुकाने की क्षमता से ज्यादा लोन ले लेते हैं, लेकिन बाद में उसकी EMI भरने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जिसने होम लेकर घर खरीदा है तो यह खबर आपके लिए है। आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे होम लोन की ईएमआई मिस करने पर आपका क्रेडिट स्कोर के साथ जेब पर डबल नुकसान होता है।

EMI नहीं देने पर क्रेडिट स्कोर होता है खराब

अगर आपने किसी बैंक से होम लोन लिया है और उसकी ईएमआई नहीं चुकाते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर खराब होता है। ज्यादातर बैंक 30-दिन के साइकल में रीपेमेंट बिहेवियर की रिपोर्ट करते हैं। बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि एक भी ईएमआई मिस करना या 30-दिन या उससे ज्यादा की चूक, पिछली हिस्ट्री के आधार पर, क्रेडिट स्कोर को 50–100 पॉइंट तक कम कर सकती है। यानी आपका क्रेडिट स्कोर खराब करता है जो आगे बैंक लोन लेने में मुश्किल पैदा कर सकता है।

बैंक ईएमआई मिस करने पर वसूलेते हैं पेनल्टी

अगर आप होम लोन की ईएमआई समय पर नहीं चुकाते हैं तो क्रेडिट स्कोर खराब होने के साथ पेनल्टी भी भरना होता है। बैंक आमतौर पर कॉन्ट्रैक्टेड रेट के ऊपर पेनल्टी इंटरेस्ट लगाते हैं। बैंकों में लेट पेमेंट चार्ज अक्सर 1–2 प्रतिशत होता है, जिसमें ओवरड्यू अमाउंट पर हर महीने 2–4 प्रतिशत का पेनल्टी इंटरेस्ट होता है। आरबीआई के प्रूडेंशियल नॉर्म्स के तहत, अगर होम लोनकी किश्तें 90 दिनों से ज्यादा समय तक बकाया रहती हैं, तो होम लोन को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) के तौर पर क्लासिफाई किया जाता है। इससे पहले, अकाउंट स्ट्रक्चर्ड रिकवरी स्टेज से गुजरता है। पहले ऑटोमेटेड रिमाइंडर शुरू होते हैं। 15-30 दिनों के बाद, कॉल और लिखकर कम्युनिकेशन बढ़ जाता है। जब देरी 30 या 60 दिनों से ज्यादा हो जाती है, तो डेडिकेटेड रिकवरी टीमें दखल दे सकती हैं। फॉर्मल NPA क्लासिफिकेशन 90-दिन की लिमिट के बाद ही होता है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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