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इस महीने में सबसे कम होती है सोने-चांदी की कीमत, खरीदने से पहले जान लें सीक्रेट

अगर आप दिवाली या धनतेरस पर सोना खरीदने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है। आजकल सोने की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं और अब यह आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कब सोने की कीमतें सबसे कम होती हैं?

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Cheapest Gold Month

अगर आप सोना खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। सोने की कीमतें लगातार सातवें आसमान को छू रही हैं और आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। वहीं दिवाली और धनतेरस के मौके पर लोग सोना खरीदना शुभ मानते हैं लेकिन 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम सोने की कीमतें होने की वजह से लोग सोना खरीदने से कतराने लगे हैं। भारत सोना खरीदना शुभ ही नहीं बल्कि निवेश के विकल्प से भी बेहतर माना जाता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि साल के कौन से महीने में सोना और चांदी खरीदना आपके लिए सबसे फायदेमंद रहेगा।

विशेषज्ञों के 45 साल के आंकड़ों से पता चलता है कि त्योहारों के मौसम में खरीदारी करना जरूरी नहीं कि सबसे लाभकारी हो, बल्कि एक और महीना है जब निवेशकों को असली “गोल्डन अवसर” मिलता है। आइए आपको बताते हैं कि किस महीने में सोने की कीमतें सबसे कम होती हैं?

कब सस्ता होता है सोना?

त्योहारों का मौसम आते ही सोना और चांदी की खरीदारी तेजी पकड़ लेती है। धनतेरस और दिवाली के मौके पर हर कोई यह मान लेता है कि यही सबसे अच्छा समय है सोना या चांदी में निवेश करने का। लेकिन क्या वाकई यही सही समय होता है? 45 साल के आंकड़ों पर किए गए एक अध्ययन में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों का सीजन नहीं, बल्कि साल का एक और महीना है जब सोने-चांदी की कीमतें सबसे कम होती हैं और निवेश के लिहाज से यह सबसे सही समय साबित होता है।

दरअसल, धनतेरस और दिवाली जैसे अवसरों पर पारंपरिक और सांस्कृतिक वजहों से सोने-चांदी की मांग बहुत बढ़ जाती है। इसी वजह से कीमतों में भी उछाल देखने को मिलता है। निवेशक और आम लोग मानते हैं कि इस समय खरीदना शुभ है, इसलिए हर कोई बाजार की तरफ दौड़ पड़ता है। लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक यह धारणा निवेश के लिहाज से हमेशा फायदेमंद नहीं होती।

इस महीने सबसे कम होती हैं कीमतें

एक्सपर्ट ने 1981 से लेकर 2025 तक के सोने और चांदी के दामों का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि अगर किसी निवेशक ने हर साल अप्रैल में ₹100 का सोना खरीदा और दिसंबर में बेचा होता, तो 45 साल में यह रकम करीब ₹3,500 हो जाती। वहीं, चांदी में यही रकम सिर्फ ₹615 के आसपास पहुंची। उनके मुताबिक सोने के लिए सबसे मजबूत महीना जनवरी से सितंबर तक का चक्र है, जबकि चांदी के लिए जुलाई से मार्च तक का। यानी, त्योहारों के महीने में निवेश करने से उतना फायदा नहीं होता जितना साल के बीच या शुरुआत में होता है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि अगर कोई निवेशक दानतेरस या दिवाली के समय सोना खरीदकर अगले साल जून में बेचता है, तो उसे बहुत कम रिटर्न मिलता है। कारण है इन महीनों में मांग बढ़ने से दाम ऊपर जाते हैं, लेकिन बाद में भाव गिर जाते हैं।

क्यों घटती-बढ़ती हैं कीमतें?

सोने और चांदी की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव कई वजहों से होता है। सबसे पहले तो त्योहारों और शादियों के मौसम में अचानक मांग बढ़ने से कीमतें चढ़ जाती हैं। लेकिन यह बढ़त लंबे समय तक नहीं टिकती। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक हालात और केंद्रीय बैंकों की नीतियाँ भी इन धातुओं के भाव पर असर डालती हैं। चांदी की कीमत पर औद्योगिक मांग का असर ज्यादा होता है, क्योंकि इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक और सोलर इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक त्योहारों के समय एकमुश्त भारी खरीदारी करने के बजाय पूरे साल धीरे-धीरे सोना और चांदी खरीदें। इससे कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा और औसतन बेहतर रिटर्न मिल सकेगा। साथ ही, निवेश का एक हिस्सा सोने-चांदी में और बाकी अन्य परिसंपत्तियों जैसे इक्विटी या बॉन्ड्स में रखना समझदारी होगी।

इस तरह देखा जाए तो त्योहारों का समय भावनात्मक रूप से जरूर खास होता है, लेकिन निवेश के लिहाज से नहीं। असली “गोल्डन मंथ” वो है जब बाजार शांत रहता है और कीमतें नीचे होती हैं यानी साल के बीच के महीने। अगर आप उस समय खरीदारी करें, तो दिवाली तक आपकी चमक वाकई सोने जैसी हो सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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