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बाजार से क्यों गायब हो रही हैं आपकी फेवरेट ड्रिंक्स? क्या इसका भी ईरान वॉर से है कनेक्शन

भीषण गर्मी के बीच बाजार से आपकी पसंदीदा डाइट कोक और कैन वाली ड्रिंक्स अचानक गायब होने लगी हैं। इस किल्लत का सीधा संबंध ईरान युद्ध से है, जिसने एल्युमीनियम की सप्लाई चेन को बाधित कर कैन का भारी संकट पैदा कर दिया है।

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Diet Coke Iran War

भारत में गर्मी का पारा चढ़ते ही ठंडे पेय पदार्थों (Soft Drinks) की मांग आसमान छूने लगती है। लेकिन इस साल, कहानी कुछ अलग नजर आ रही है। अगर आप स्टोर पर अपनी पसंदीदा 'डाइट कोक' या कैन वाली अन्य कोल्ड ड्रिंक्स ढूंढ रहे हैं और आपको खाली शेल्फ मिल रहे हैं, तो यह महज इत्तेफाक नहीं है। दरअसल, भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में कैन वाली ड्रिंक्स की भारी कमी देखी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस किल्लत का सीधा संबंध हजारों किलोमीटर दूर चल रहे ईरान युद्ध (Iran War) और मध्य पूर्व के तनाव से है।

ईरान युद्ध और एल्युमीनियम का संकट

शायद आप सोच रहे होंगे कि युद्ध और कोल्ड ड्रिंक का क्या लेना-देना? इसका जवाब छिपा है उस 'कैन' में जिसमें आपकी ड्रिंक आती है। ये कैन 'एल्युमीनियम' से बने होते हैं। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति ने वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। एल्युमीनियम एक ऐसी धातु है जिसकी माइनिंग, प्रोसेसिंग और शिपिंग के लिए मध्य पूर्व (Middle East) के रास्ते बहुत महत्वपूर्ण हैं। युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में रुकावट आई है और कच्चे माल की आवाजाही ठप हो गई है, जिससे एल्युमीनियम कैन बनाने वाली कंपनियों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

सप्लाई चेन पर 'डबल अटैक'

केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एल्युमीनियम की बढ़ती कीमतों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। जब कच्चे माल की कमी होती है, तो उत्पादन लागत बढ़ जाती है। भारत में सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली दिग्गज कंपनियां, जैसे कोका-कोला और पेप्सिको, अपने कैन के लिए कुछ बड़े मैन्युफैक्चरर्स पर निर्भर हैं। इन निर्माताओं के पास पर्याप्त एल्युमीनियम शीट न होने के कारण कैन का उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत तक गिर गया है। यही कारण है कि कंपनियां चाहकर भी बाजार की मांग को पूरा नहीं कर पा रही हैं।

डाइट कोक ही सबसे ज्यादा प्रभावित क्यों?

मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संकट का सबसे ज्यादा असर 'डाइट कोक' और 'कोक जीरो' जैसी प्रीमियम ड्रिंक्स पर पड़ा है। इसकी वजह यह है कि ये ड्रिंक्स मुख्य रूप से 300ml और 330ml के कैन में ही बेची जाती हैं। आम कोल्ड ड्रिंक्स तो प्लास्टिक की बोतलों (PET bottles) में मिल जाती हैं, लेकिन डाइट वर्जन के शौकीन ज्यादातर कैन ही पसंद करते हैं। कैन की कमी का मतलब है डाइट कोक की कमी। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई रेस्टोरेंट्स और कैफे ने अपने मेन्यू कार्ड से 'कैन ड्रिंक्स' को अस्थाई रूप से हटा दिया है।

कंपनियों का 'प्लान-बी'

इस संकट से निपटने के लिए पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियां अब कांच की बोतलों (RGB) और प्लास्टिक की बोतलों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं। लेकिन समस्या यह है कि प्रीमियम ग्राहकों के बीच कैन का अपना एक अलग क्रेज है, जिसकी भरपाई बोतलें नहीं कर सकतीं। यदि ईरान युद्ध और लंबा खिंचता है, तो आने वाले महीनों में न केवल कोल्ड ड्रिंक्स बल्कि कैन में आने वाले अन्य उत्पाद जैसे बीयर, जूस और डिब्बाबंद भोजन (Packaged Food) की कीमतें भी बढ़ सकती हैं या उनकी उपलब्धता और कम हो सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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