देश में बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता के लिए राहत की एक बड़ी और अच्छी खबर आई है। केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को कम करने और लोगों को सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 30 बेहद जरूरी दवाओं की खुदरा (रिटेल) कीमतें तय कर दी हैं। सरकार के इस फैसले से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, विटामिन, कैल्शियम, हड्डी रोग और यहां तक कि अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं अब काफी सस्ती मिलेंगी। NPPA ने साफ कर दिया है कि ये नई कीमतें तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू कर दी गई हैं, जिससे करोड़ों मरीजों की जेब पर पड़ने वाला बोझ काफी कम हो जाएगा।
30 दवाइयों के दाम घटे
सरकार ने दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO), 2013 के नियमों के तहत अलग-अलग बीमारियों में इस्तेमाल होने वाले करीब 30 जरूरी ड्रग फॉर्मूलेशन की कीमतें फिक्स की हैं। अगर इनके दामों के गणित को समझें, तो डायबिटीज (मधुमेह) के इलाज में काम आने वाली दवा 'एंपाग्लीफ्लोजिन सिटाग्लिाप्टन और मेटाफॉर्मिन' की कीमत अब 14.88 रुपये प्रति टैबलेट तय की गई है। वहीं, डायबिटीज की ही एक अन्य लोकप्रिय दवा 'ग्लिंपिराइड और नेटाफॉर्मिन' की टैबलेट अब मरीजों को मात्र 11.91 रुपये में मिलेगी। ब्लड प्रेशर (BP) और दिल की बीमारियों के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली 'बाइसोप्रोल फ्यूमरेट और एमलोडिपिन' की टैबलेट की कीमत अब घटकर सिर्फ 9.40 रुपये प्रति टैबलेट कर दी गई है। इसके अलावा, ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद दी जाने वाली बेहद महंगी दवा 'टार्कोलिमन प्रोलॉग्न्ड रिलीज कैप्सूल' की कीमत भी अब 127 रुपये प्रति कैप्सूल तय कर दी गई है।
गंभीर बीमारियों के अलावा सरकार ने दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सप्लीमेंट्स और पेनकिलर के दाम भी नियंत्रित किए हैं। शरीर में विटामिन्स की कमी को पूरा करने के लिए दिए जाने वाले 'विटामिन D3 ओरल सॉल्यूशन' के 1 मिलीलीटर (ml) की कीमत अब 14.91 रुपये तय की गई है। वहीं, हड्डियों और नसों की मजबूती के लिए डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली कैल्शियम की दवा, जिसमें 'मिथाइलकोबालामिन, एल-मिथाइलफोलेट कैल्शियम और पाइरिडोक्सल-5 फॉस्फेट' शामिल हैं, उसकी कीमत अब 19.78 रुपये प्रति टैबलेट होगी। इसके साथ ही, जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में काम आने वाले 'पेनकिलर जेल' की कीमत को भी नियंत्रित करते हुए सरकार ने इसे 3.31 रुपये प्रति ग्राम तय कर दिया है।
दुकानदारों के लिए नियम
सरकार ने दवा दुकानदारों और कंपनियों के लिए कड़े नियम जारी किए हैं। नए आदेश के मुताबिक, सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को अपनी दुकान पर इन जरूरी दवाओं की नई कीमत सूची (प्राइस लिस्ट) को साफ तौर पर प्रदर्शित करना होगा ताकि ग्राहक इसे आसानी से देख सकें। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी दवा निर्माता (मैन्युफैक्चरर) या मार्केटिंग कंपनी तय की गई एमआरपी (MRP) से एक पैसा भी ज्यादा वसूलती है, तो उस कंपनी के खिलाफ न सिर्फ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि वसूली गई अतिरिक्त रकम को ब्याज सहित सरकारी खजाने में जमा करना होगा।
MRP से ज्यादा वसूला पैसा तो क्या होगा?
सरकार ने आम उपभोक्ताओं और मरीजों से भी सजग रहने की अपील की है। कोई भी दवा खरीदते समय पैकेट पर लिखी एमआरपी (MRP) को ध्यान से जरूर देखें। अगर कोई दवा दुकानदार या अस्पताल आपसे सरकार द्वारा तय की गई कीमतों से अधिक पैसे मांगता है, तो आप चुप बैठने के बजाय इसकी शिकायत सीधे राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट nppa.gov.in पर जाकर ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। इस जागरूक कदम से न सिर्फ आपके पैसों की बचत होगी, बल्कि बाजार में दवाओं की कालाबाजारी और मनमानी कीमतों पर भी पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी।
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