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40% तक महंगा हुआ कच्चा तेल, 150 डॉलर प्रति बैरल तक हो सकती है कीमत; क्या फिर से मचेगी तबाही?

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को महज 15 दिनों के भीतर 40 फीसदी से ज्यादा उछाल दिया है। ऐसे में लोगों के मन में फिर से सवाल उठने लगा है कि क्या कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर तक जा सकती है?

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Crude Oil 150 dollar

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो गया है क्योंकि कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मचा दिया है। केवल मार्च के महीने में ही ब्रेंट क्रूड की कीमतें 40 फीसदी तक उछल गई हैं और 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द ही नियंत्रण में नहीं आई, तो कच्चा तेल $150 प्रति बैरल के ऐतिहासिक स्तर को भी पार कर सकता है। यह स्थिति न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए महंगाई का एक नया दौर लेकर आ सकती है, क्योंकि कच्चा तेल ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि जैसे हर प्रमुख क्षेत्र की लागत को सीधे प्रभावित करता है।

युद्ध की शुरुआत से पहले 27 फरवरी को कच्चे तेल की कीमत लगभग 73 डालर प्रति बैरल थी। वहीं आज यानी 16 मार्च को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 104 डॉलर के पार पहुंच गई है। यानी महज कुछ ही दिनों में 40 फीसदी तक क्रूड ऑयल महंगा हो गया है.

ईरान-अमेरिका और इजराइल युद्ध से मची हलचल

इस संकट की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा युद्ध जैसा माहौल है। ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादकों में से एक है और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे समुद्री रास्तों पर उसका नियंत्रण है, जहां से दुनिया का लगभग एक-तिहाई तेल गुजरता है। युद्ध की आशंका ने सप्लाई चेन को पूरी तरह बाधित कर दिया है। तेल के टैंकरों को रास्ता बदलना पड़ रहा है और बीमा लागत में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। निवेशकों के बीच डर का माहौल है, जिससे तेल की कीमतों में सट्टेबाजी और मांग दोनों बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक युद्ध की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तेल की कीमतों में स्थिरता आना नामुमकिन है।

कब बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। भारत अपनी तेल की कुल जरूरत का लगभग 85% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो भारत के 'करंट अकाउंट डेफिसिट' (CAD) पर सीधा दबाव पड़ता है। मार्च में आई 40% की यह तेजी भारत के राजकोषीय गणित को बिगाड़ सकती है। यदि क्रूड $150 के पार चला जाता है, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कीमतों को बनाए रखना असंभव होगा। अनुमान है कि इस बढ़ोत्तरी के कारण आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹15 से ₹20 तक की भारी वृद्धि की जा सकती है।

बढ़ेगा खर्च

कच्चे तेल की महंगाई केवल गाड़ियों के ईंधन तक सीमित नहीं रहती। यह एक 'चेन रिएक्शन' की तरह काम करती है। माल ढुलाई (Logistics) महंगी होने के कारण फल, सब्जियां और रोजमर्रा की अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक, खाद (Fertilizer) और पेंट जैसे उद्योगों में कच्चे तेल का उपयोग कच्चे माल के रूप में होता है, जिससे इन उत्पादों की लागत भी बढ़ जाती है। भारत की मुद्रा, यानी रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होने लगा है, क्योंकि तेल आयात के लिए भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे अन्य विदेशी सामानों का आयात भी महंगा हो जाता है, जिससे समग्र रूप से देश में महंगाई की दर बढ़ जाती है।

क्या 150 डॉलर के पार जाएगा क्रूड ऑयल

भविष्य की बात करें तो बाजार के जानकारों की राय बंटी हुई है। कुछ का कहना है कि $150 का स्तर महज कुछ हफ्तों की बात है, वहीं कुछ का मानना है कि यदि अमेरिका अपने सामरिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) को बाजार में उतारता है, तो कीमतों पर कुछ लगाम लग सकती है। हालांकि, ईरान की ओर से होने वाली किसी भी बड़ी कार्रवाई से तेल की सप्लाई पूरी तरह रुक सकती है, जिससे कीमतें $200 तक भी जा सकती हैं। भारत सरकार भी इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ बातचीत के जरिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रही है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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