Crude Oil Price : दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है और इसकी वजह सिर्फ मांग-आपूर्ति का संतुलन नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पहले से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट बना हुआ था। अब यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाकर एक दूसरा मोर्चा खोल दिया है। इससे दुनिया के दो सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्ग एक साथ खतरे में आ गए हैं। यही वजह है कि कई बड़े निवेश बैंक अब 120 डॉलर से लेकर 150 डॉलर प्रति बैरल तक के संभावित स्तर की चर्चा करने लगे हैं।
इतना महंगा क्यों हुआ कच्चा तेल?
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बंद हुआ। यह मई के बाद पहली बार है जब कीमतें तीन अंकों में पहुंची हैं। बाजार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि तेल की सप्लाई सिर्फ उत्पादन पर नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से दुनिया तक पहुंचाने पर भी निर्भर करती है।
अमेरिका-ईरान टकराव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पहले ही बुरी तरह प्रभावित है। इसी बीच हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। इन घटनाओं ने वैश्विक तेल बाजार में घबराहट पैदा कर दी और निवेशकों ने तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया।
बाब-अल-मंडेब क्यों बन गया नया संकट?
अब तक माना जा रहा था कि अगर होर्मुज प्रभावित होता है तो सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिये लाल सागर के यनबू बंदरगाह तक तेल पहुंचाकर निर्यात जारी रख सकता है। लेकिन हूती विद्रोहियों ने उसी वैकल्पिक रास्ते को निशाना बना दिया है। यानि एक तरफ होर्मुज पर संकट है और दूसरी तरफ बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ गया है। अगर दोनों रास्तों पर एक साथ बाधा आती है तो दुनिया के लिए तेल की सप्लाई करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
क्या अब 150 डॉलर तक पहुंच सकता है तेल?
गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है तो इस साल की चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। अगर इसके साथ बाब-अल-मंदेब और स्वेज नहर में भी लगातार दिक्कत बनी रही तो कीमतों में और ज्यादा उछाल आ सकता है। वहीं आरबीसी कैपिटल मार्केट्स का मानना है कि यदि संघर्ष पूरे क्षेत्रीय युद्ध में बदलता है और समुद्री व्यापार और ज्यादा प्रभावित होता है तो कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। हालांकि यह सबसे खराब स्थिति का अनुमान है, लेकिन इससे बाजार की चिंता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
भारत पर कितना पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं, तो पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा ATF का दाम बढ़ने से हवाई यात्रा का खर्च बढ़ सकता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। सरकार का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है।
रुपये पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा महंगाई बढ़ने से ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
