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$100 पार क्रूड़, अमेरिका से जापान तक हाहाकार, 3 वजहों से भारत में नहीं बढ़े डीजल-पेट्रोल के दाम

भारत दुनिया में क्रूड का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है। होर्मुज बंद होने के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। क्रूड का दाम 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। इसके बाद भी भारत में डीजल-पेट्रोल के रेट नहीं बढ़े हैं। इसके पीछे तीन बड़ी वजह हैं।

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भारत में स्थिर बनी हुई है पेट्रोल-डीजल की कीमत

Crude 100 Dollar Impact: क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार पहुंच चुका है और अमेरिका से जापान तक महंगाई और ईंधन संकट की चिंता बढ़ गई है। लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर हैं। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं, जो देश को वैश्विक झटकों से बचा रहे हैं। क्रूड के 100 डॉलर पार जाने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल कीमतों का स्थिर रहना मजबूत रणनीति का नतीजा है। बड़ा स्टॉक, सस्ता आयात और OMCs का मैनेजमेंट मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आम जनता पर तत्काल बोझ न पड़े।

देशपेट्रोल कीमत में बढ़ोतरी (%)ट्रेंड
अमेरिका~20% – 22%तेज उछाल
कनाडा~25%तेज उछाल
जर्मनी~14% – 15%लगातार बढ़ोतरी
यूके~10% – 12%मध्यम तेजी
जापान~8% – 10%नियंत्रित बढ़ोतरी
चीन~10% – 11%सरकारी नियंत्रण के साथ बढ़त
फ्रांस~12%नियंत्रित बढ़ोतरी
इटली~15% – 16%तेज उछाल
दक्षिण कोरिया~10%+सब्सिडी के बावजूद बढ़त
भारत0% (लगभग स्थिर)कीमतें स्थिर
पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद क्रूड ऑयल के $100 पार जाने से दुनिया की टॉप अर्थव्यवस्थाओं में पेट्रोल कीमतों में साफ उछाल दिखा है। जहां अमेरिका में करीब 20% तक बढ़ोतरी हुई है, कनाडा और इटली में 15-25% तक तेजी दर्ज की गई, जर्मनी, फ्रांस और यूके जैसे यूरोपीय देशों में 10-15% का इजाफा हुआ, जबकि जापान, चीन और दक्षिण कोरिया में सरकारी नियंत्रण के बावजूद 8-11% तक कीमतें बढ़ीं, इसके उलट भारत एकमात्र बड़ा देश बना रहा, जहां पेट्रोल-डीजल के दाम लगभग स्थिर रहे, जो इसकी मजबूत सप्लाई रणनीति, सस्ते आयात और OMCs के प्राइस मैनेजमेंट को दर्शाता है।

ग्लोबल संकट में भी भारत क्यों अलग

पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई बाधित होने से दुनिया के कई देश ईंधन संकट झेल रहे हैं। लेकिन भारत ने पहले से की गई तैयारी के दम पर हालात को नियंत्रण में रखा है। यही वजह है कि जहां दूसरे देश कीमतों में तेजी देख रहे हैं, भारत में असर सीमित बना हुआ है।

पहला कारण: 70 दिन का मजबूत बफर

भारत के पास स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के स्टॉक को मिलाकर करीब 70-74 दिनों की मांग पूरी करने की क्षमता है। यह बफर अचानक सप्लाई शॉक को झेलने में मदद करता है और कीमतों पर तत्काल दबाव नहीं आने देता।

दूसरा कारण: रूस से सस्ता तेल

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूस से डिस्काउंट पर बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदा है। इससे कंपनियों को लागत कम रखने में मदद मिली और उन्होंने अतिरिक्त मार्जिन को बफर के तौर पर इस्तेमाल किया। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू कीमतों में तेजी नहीं दिख रही।

तीसरा कारण: OMCs का प्राइस मैनेजमेंट

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों को तुरंत पास नहीं करतीं। सस्ते दौर में बनाए गए मार्जिन का इस्तेमाल महंगे दौर में किया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को झटका कम लगे। यह ‘शॉक एब्जॉर्बर’ मॉडल भारत को बाकी देशों से अलग बनाता है।

सरकार ने कैसे संभाला ये संकट

$100 पार क्रूड और वैश्विक संकट के बीच सरकार ने इस स्थिति को पहले से बनाई गई रणनीति के दम पर स्मार्ट तरीके से संभाला है। इसमें स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व के जरिए 70 दिनों का बफर तैयार करना, रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदकर लागत घटाना और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को ‘शॉक एब्जॉर्बर’ की तरह इस्तेमाल करना शामिल है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं तक न पहुंचे और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बनाए रखे जा सकें। इसके अलावा जब क्रूड काफी सस्ता था, तो सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर रेवेन्यू बढ़ाया, अब क्रूड महंगा है, तो सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटा दी है। इस रणनीति के चलते क्रूड की बढ़ी हुई लागत को जहां ऑयल मार्केट कंपनियां आसानी से सहन कर पा रही हैं, वहीं आम लोगों को भी राहत मिली हुई है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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