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Closing Bell: दुनिया दौड़ी, क्यों उलझा रहा भारत का शेयर बाजार? 5 दिन में ₹2.65 लाख करोड़ गंवाए

भारतीय शेयर बाजार आज कमजोरी के साथ बंद हुआ है। भले ही बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। लेकिन, मार्केट ब्रेड्थ से व्यापक बाजार में कमजोरी का पता चलता है।

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गिरावट में बंद हुआ बाजार

Share Market Sensex Nifty Closing Bell Toady: भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते का अंत हल्की गिरावट के साथ किया, लेकिन असली कहानी Sensex और निफ्टी के मामूली नुकसान से कहीं बड़ी है। 5 कारोबारी सत्र में BSE का मार्केट कैप करीब ₹2.65 लाख करोड़ घट गया। शुक्रवार को Nifty 29.85 अंक यानी 0.12% की गिरावट के साथ 24,366 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 70.71 अंक यानी 0.09% फिसलकर 78,009.25 पर रहा। ऊपर से देखने पर बाजार स्थिर दिखता है, लेकिन शेयरों के अंदर की तस्वीर बताती है कि निवेशकों को रिटर्न निकालने के लिए अब सिर्फ इंडेक्स देखना काफी नहीं है।

दुनिया में तेजी, भारत में क्यों सुस्ती?

वैश्विक बाजारों में शुक्रवार को तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं थी। निक्केई 225 करीब 0.75% ऊपर रहा और कोस्पी 2.36% मजबूत हुआ। डैक्स में भी 0.76% की बढ़त दिखी। अमेरिकी बाजारों में पिछली कारोबारी अवधि के दौरान एसएंडपी 500 करीब 0.65% और नैस्डैक 0.81% चढ़े थे। यानी ग्लोबल बाजारों में जोखिम लेने का मूड बना हुआ है। इसके मुकाबले भारतीय बाजार लगातार एक दायरे में घूम रहा है। निफ्टी का शुक्रवार का लो 24,296.80 रहा, जबकि हाई 24,405.20। यानी पूरे दिन इंडेक्स करीब 108 अंकों के दायरे में रहा और अंत में मामूली नुकसान के साथ बंद हुआ। यह बताता है कि बाजार में बड़ी दिशा को लेकर फिलहाल स्पष्टता नहीं है।

ज्यादातर शेयर टूटे

निफ्टी जहां सिर्फ 0.12% नीचे रहा, लेकिन NSE पर 1,855 शेयर गिरावट में बंद हुए, जबकि बढ़ने वाले शेयरों की संख्या 1,479 रही। BSE पर भी 2,322 शेयर लाल निशान में रहे और 1,952 शेयर बढ़े। यानी बेंचमार्क इंडेक्स की छोटी गिरावट बाजार के असली दर्द को छिपा रही है। बड़े और चुनिंदा शेयरों के सहारे निफ्टी अपेक्षाकृत स्थिर रहा, लेकिन व्यापक बाजार में बिकवाली का दबाव ज्यादा रहा।

Midcap-Smallcap में ज्यादा दर्द

ब्रॉडर मार्केट की कमजोरी भी इसी कहानी को मजबूत करती है। निफ्टी मिडकैप सिलेक्ट 0.71% और मिडकैप 50 0.74% टूट गया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.69% और स्मॉलकैप 50 में 0.70% की गिरावट रही। यानी जिन निवेशकों का पैसा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगा है, उनके लिए शुक्रवार का बाजार निफ्टी की सिर्फ 0.12% गिरावट से कहीं ज्यादा कमजोर रहा। सेक्टरों में भी तस्वीर चुनिंदा हिस्सों में दबाव वाली रही। फाइनेंशियल सर्विसेज एक्स-बैंक 1.02%, फार्मा 0.90%, मेटल 0.71% और ऑटो 0.63% नीचे रहे। इसके उलट कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.76% और मीडिया 0.96% चढ़े।

5 दिन में ₹2.65 लाख करोड़ का नुकसान

बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक 7 अगस्त को कुल बाजार पूंजीकरण ₹4,94,81,821.63 करोड़ था। 14 अगस्त को यह घटकर करीब ₹4,92,16,430.24 करोड़ रह गया। यानी एक हफ्ते के दौरान करीब ₹2,65,391 करोड़, यानी लगभग ₹2.65 लाख करोड़ की मार्केट वैल्यू कम हुई। यह आंकड़ा बताता है कि बाजार में भले ही सेंसेक्स और निफ्टी किसी बड़ी गिरावट से नहीं गुजरे हों, लेकिन व्यापक स्तर पर शेयरों में वैल्यूएशन एडजस्टमेंट और मुनाफावसूली का असर दिखाई दे रहा है।(

नई तेजी के लिए नहीं मिल रहा ट्रिगर

दिलचस्प बात यह है कि बाजार में घबराहट दिखाने वाला India Vix शुक्रवार को 0.85% गिरकर 11.32 पर आ गया। इसका मतलब है कि बाजार में डर घट गया है। निवेशक घबराए हुए नहीं हैं। बाजार में ज्यादा बड़ी समस्या कंसोलिडेशन और दिशा की कमी है। क्रूड भी शुक्रवार को लगभग 87.21 डॉलर प्रति बैरल पर रहा और रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 95.43 पर था। यानी बाजार के सामने कोई ऐसा एक बड़ा झटका नहीं था, जो अकेले गिरावट की पूरी कहानी समझा दे। असली दबाव घरेलू स्तर पर स्टॉक चयन, सेक्टर रोटेशन और मुनाफावसूली का है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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