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फिर बढ़ी महंगाई, 3.93% पर पहुंचा CPI, टमाटर ने दिखाए तेवर, आलू-मटर में नरमी

मई 2026 में महंगाई सिर उठाती दिखी है। CPI डेटा के मुताबिक मई में रिटेल इन्फ्लेशन बढ़कर 3.93% पहुंच गया है। वहीं, इस दौरान खाद्य महंगाई में 4.78% हो गई है।

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फिर बढ़ी महंगाई, 3.93% पर पहुंचा CPI, टमाटर ने दिखाए तेवर, आलू-मटर में नरमी

CPI Inflation : आम लोगों को मई महीने में महंगाई से थोड़ी ज्यादा मार झेलनी पड़ी है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48% थी। यानी एक महीने में महंगाई दर में 45 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

खाद्य महंगाई भी बढ़ी

मई में खाद्य महंगाई (CFPI) बढ़कर 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 4.85% और शहरी क्षेत्रों में 4.66% दर्ज की गई। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी खुदरा महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह रही।

टमाटर और चांदी ने बढ़ाई महंगाई

मई में सबसे ज्यादा महंगाई चांदी के आभूषणों में देखने को मिली। इस श्रेणी में सालाना महंगाई 155.23% तक पहुंच गई। इसके अलावा टमाटर की कीमतों में 48.43%, सोने-हीरे-प्लैटिनम के आभूषणों में 40.93% और अदरक में 32.49% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इन वस्तुओं ने दी राहत

कुछ वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने महंगाई को और अधिक बढ़ने से रोका। आलू की कीमतों में 23.71% की गिरावट दर्ज हुई। मटर में 11.47%, मोटर कार और जीप में 7.19% तथा जीरे में 4.59% की कमी रही।

राज्यों में कहां सबसे ज्यादा महंगाई?

बड़े राज्यों में तेलंगाना 6.15% की खुदरा महंगाई के साथ सबसे ऊपर रहा। इसके बाद तमिलनाडु में 5.11%, पुदुचेरी में 5.00%, आंध्र प्रदेश में 4.90% और कर्नाटक में 4.59% महंगाई दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश में महंगाई 3.97% रही जबकि दिल्ली में यह 2.50% दर्ज की गई।

    क्या बता रहा है डेटा?

    महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% लक्ष्य के आसपास बनी हुई है, लेकिन अप्रैल के मुकाबले बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिर दबाव बना रही हैं। आने वाले मानसून और कृषि उत्पादन के आंकड़े आगे की महंगाई दिशा तय करेंगे।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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