भारत की स्थापित ऊर्जा भंडारण क्षमता वर्तमान के लगभग एक गीगावाट-घंटा से बढ़कर 2033 तक 346 गीगावाट-घंटा तक पहुंचने का अनुमान है। शुक्रवार को यहां ’स्टेशनरी एनर्जी स्टोरेज इंडिया’ (सेसी) 2026 सम्मेलन में पेश किए गए एक उद्योग श्वेत पत्र में यह जानकारी दी गई। सेसी 2026 सम्मेलन का आयोजन उद्योग निकाय ’भारत उर्जा भंडारण गठबंधन’ (आईईएसए) द्वारा किया जा रहा है, जो यहां जारी ’भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026’ का हिस्सा है।
ऊर्जा भंडारण का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा
श्वेत पत्र के अनुसार, भारत में स्थिर ऊर्जा भंडारण का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। भारत ऊर्जा भंडारण गठबंधन (IESA) का कहना है कि अभी जो बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की परियोजनाएं बन रही हैं, उनकी कुल क्षमता बढ़कर रिकॉर्ड 92 गीगावाट-घंटा तक पहुंच गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अभी देश में कुल स्थापित क्षमता 1 गीगावाट-घंटा से भी कम है, लेकिन आने वाले समय में इसमें बहुत बड़ी बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि साल 2033 तक यह क्षमता बढ़कर 346 गीगावाट-घंटा से ज्यादा हो जाएगी।
शुक्रवार को सेसी 2026 सम्मेलन में इस विस्तार की रूपरेखा पर जोर दिया गया, जहां आईईएसए ने ’कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस’ (सीईएस) के साथ मिलकर तैयार किए गए इस श्वेत पत्र को जारी किया। सेसी 2026 सम्मेलन में 10 से अधिक देशों के 450 से अधिक उद्योग जगत के नेताओं, सरकारी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन ग्रिड इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एस सी सक्सेना ने किया। उन्होंने देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में ऊर्जा भंडारण को अपनाने में तेजी लाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। आईईएसए के अध्यक्ष देबमाल्या सेन ने कहा, ’’...यह भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म उत्पादन के लक्ष्य को साकार करने के लिए आवश्यक रणनीतिक स्पष्टता प्रदान करता है, जिसमें ऊर्जा भंडारण एक लचीले और विश्वसनीय ग्रिड की रीढ़ के रूप में काम करेगा।’’
(इनपुट-भाषा)
