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Diwali Shayari: दोगुना हो जाएगा दीपावली का मजा, एक बार पढ़कर देखें दीवाली पर लिखे ये मशहूर शेर

Deepawali par Shayari, Diwali par Shayari, Diwali Shayari in Hindi (दिवाली शायरी): दिवाली को कई शायरों ने कलम से बेहद खूबसूरत अंदाज में बयां किया है, जो इस उत्सव के उल्लास को और अधिक गहरा कर देते हैं।

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दिवाली शायरी हिंदी में

Diwali par Shayari in Hindi, Diwali par Shayariyan: दीपावली उम्मीद, उमंग और उजाले का एक ऐसा महापर्व है जो हमारे जीवन में नई ऊर्जा भर देता है। यह त्योहार अंधेरे पर प्रकाश की जीत, अज्ञानता पर ज्ञान के प्रकाश और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि कितनी भी घनी अंधेरी रात क्यों न हो, उसके बाद सुबह का उजाला जरूर आता है। यही वजह है कि दीपावली का यह पावन पर्व केवल घरों को ही नहीं, इंसानी दिलों को भी रोशन कर देता है।

इस रोशनी के त्योहार की खूबसूरती को देश के कई मशहूर शायरों ने अपनी शानदार शायरी में भी बेहद खूबसूरत अंदाज में बयां किया है, जो इस उत्सव के उल्लास को और अधिक गहरा कर देते हैं। यहां देखें दिवाली पर शायरी हिंदी में:

Diwali par Shayari | Diwali ki Shayari

1. ये है दिवाली की रात और 'ऐन-मुमकिन है

दिया किसी ने मिरे नाम का जलाया ही हो

- फ़रहत एहसास

2. दाग़ों की बस दिखा दी दिवाली में रौशनी

हम सा न होगा कोई जहाँ में दिवालिया

- हातिम अली मेहर

3. सभी के दीप सुंदर हैं हमारे क्या तुम्हारे क्या

उजाला हर तरफ़ है इस किनारे उस किनारे क्या

- हफ़ीज़ बनारसी

4. दीवाली की ख़ुशी थी पटाख़ों का शोर था

मैं कर रहा था उस की ख़मोशी से गुफ़्तुगू

- बशीर महताब

5. दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात-ओ-ऐश है

सब मुहय्या है जो इस हंगाम के शायाँ है शय

- नज़ीर अकबराबादी

Diwali Urdu Shayari In Hindi

6. अनगिनत सफ़ीनों में दीप जगमगाते हैं

रात ने लुटाया है रंग-ओ-नूर पानी पर

- अक़ील नोमानी

7. था इंतिज़ार मनाएँगे मिल के दीवाली

न तुम ही लौट के आए न वक़्त-ए-शाम हुआ

- आनिस मुईन

8. हर तरफ़ फैली हुई थी रौशनी ही रौशनी

वो बहारें थीं कि अब के बाग़ में रस्ता न था

- शहज़ाद अहमद

9. आज की रात दिवाली है दिए रौशन हैं

आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूँ

- अज़्म शाकरी

Diwali Shayari 2 line

10. दहलीज़ों पर दीप जलाने आई तो है दीवाली

फिर भी आँखों के आँगन हैं बिल्कुल ख़ाली-ख़ाली

- राही मासूम रज़ा

11. वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था

दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से

- कैफ़ भोपाली

12. मेले में गर नज़र न आता रूप किसी मतवाली का

फीका फीका रह जाता त्यौहार भी इस दीवाली का

- मुमताज़ गुरमानी

उम्मीद करते हैं कि दिवाली पर लिखे ये शेर आपको जरूर पसंद आए होंगे। आप चाहे तो दीवाली के दिन इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर भी कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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