बिजनेस

CMPDI Listing: फ्लॉप शो साबित हुआ IPO, 7% डिस्काउंट पर लिस्टिंग, निवेशकों को कितना नुकसान?

CMPDI IPO ने निवेशकों को निराश किया है। कोल इंडिया की इस सहायक कंपनी से BCCL जैसे प्रदर्शन की उम्मीद थी, जिसने 96% लिस्टिंग गेन दिया था। लेकिन, CMPDI की 7% डिस्काउंट लिस्टिंग हुई है, जिससे रिटेल निवेशकों को प्रति लॉट करीब 800 रुपये का नुकसान हुआ है।

Image

निवेशकों को लगा झटका

CMPDI Listing : ₹1,842 करोड़ का CMPDI IPO निवेशकों के लिए उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। सोमवार को कंपनी के शेयर डिस्काउंट पर लिस्ट हुए और पहले ही दिन गिरावट दर्ज की, जिससे यह IPO लिस्टिंग के लिहाज से फ्लॉप साबित हुआ। CMPDI का इश्यू प्राइस ₹172 तय किया गया था, लेकिन शेयर ₹162.8 पर लिस्ट हुआ। यानी निवेशकों को शुरुआत में ही करीब 5% का नुकसान हुआ। यह संकेत देता है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम और मांग के बावजूद लिस्टिंग कमजोर रही।

निवेशकों को कितना नुकसान?

CMPDI IPO में रिटेल निवेशकों के लिए एक लॉट में 87 शेयर थे। ₹172 के इश्यू प्राइस के मुकाबले शेयर ₹162.8 पर लिस्ट हुआ और बाद में करीब ₹160 तक फिसल गया। इस हिसाब से निवेशकों को लिस्टिंग के समय प्रति शेयर ₹9.2 यानी करीब ₹800 प्रति लॉट का नुकसान हुआ, जो गिरकर मौजूदा स्तर पर लगभग ₹12 प्रति शेयर यानी करीब ₹1,000 प्रति लॉट तक पहुंच गया।

पहले दिन और फिसला शेयर

लिस्टिंग के बाद भी शेयर में रिकवरी नहीं दिखी। कारोबार के दौरान यह ₹160 तक फिसल गया। इस तरह दिन के अंत तक निवेशकों का नुकसान और बढ़ गया।

बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव और IPO वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता इसका बड़ा कारण है। हाल के दिनों में कई IPO में लिस्टिंग गेन नहीं मिलने से निवेशकों का रुझान भी थोड़ा कमजोर पड़ा है।

क्या संकेत देता है यह ट्रेंड

CMPDI की कमजोर लिस्टिंग यह दिखाती है कि अब निवेशक सिर्फ सब्सक्रिप्शन नहीं, बल्कि वैल्यूएशन और ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ओवरप्राइस्ड या औसत ग्रोथ वाली कंपनियों को बाजार तुरंत रिवार्ड नहीं कर रहा। ऐसे IPO में जल्दबाजी में एंट्री लेने से बचना चाहिए। अगर कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हैं तो गिरावट पर लंबी अवधि के नजरिए से अवसर बन सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।

कैसा रहा था सब्सक्रिप्शन?

CMPDI IPO को निवेशकों का ठीक-ठाक लेकिन बेहद मजबूत नहीं कहा जा सकने वाला रिस्पॉन्स मिला। कुल मिलाकर यह इश्यू करीब 3 गुना (3x) के आसपास सब्सक्राइब हुआ था। रिटेल कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, जबकि QIB और HNI सेगमेंट में मांग सीमित दिखी। यही वजह रही कि लिस्टिंग के समय मजबूत प्रीमियम नहीं बन पाया और शेयर डिस्काउंट पर लिस्ट हुआ।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article