बिजनेस

ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध का असर! चीन ने घटाया अपना इकोनॉमिक ग्रोथ टारगेट

China Economic Growth Target: चल रहे ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच चीन ने इस वर्ष के लिए अपनी आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य 4.5 से 5 प्रतिशत के बीच तय किया है। यह लक्ष्य पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा कम है। लंबे समय से जारी रियल एस्टेट संकट, कमजोर घरेलू मांग और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सरकार ने यह सावधानी भरा फैसला लिया है। सरकार का मानना है कि चुनौतियों के बावजूद स्थिर विकास संभव है।

Image

चीन ने घटाया आर्थिक विकास लक्ष्य, 4.5 से 5 प्रतिशत वृद्धि का रखा अनुमान (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

China Economic Growth Target: चल रहे ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच चीन ने इस साल के लिए अपना आर्थिक विकास लक्ष्य घटाकर 4.5 प्रतिशत से 5 प्रतिशत के बीच तय किया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश लंबे समय से चल रही प्रॉपर्टी संकट, कमजोर घरेलू मांग और वैश्विक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। पिछले तीन वर्षों से सरकार करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य तय करती आ रही थी। साल 2025 में चीन की अर्थव्यवस्था 5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी, लेकिन इस बार सरकार ने थोड़ा कम लक्ष्य रखते हुए परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन अपनाने का संकेत दिया है।

संसद सत्र में हुआ ऐलान

एपी की रिपोर्ट के मुताबिक यह लक्ष्य गुरुवार को चीन की संसद के वार्षिक सत्र के उद्घाटन के दौरान घोषित किया गया। देश के प्रधानमंत्री Li Qiang ने यह रिपोर्ट संसद में पेश की। यह सत्र National People's Congress का है, जिसमें करीब 3,000 प्रतिनिधि शामिल होते हैं। हालांकि इसे अक्सर औपचारिक मुहर लगाने वाली संस्था माना जाता है, लेकिन यहां आने वाले वर्षों की नीतियों की दिशा तय की जाती है। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार उपलब्धियों को स्वीकार करती है, लेकिन वह चुनौतियों को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि लक्ष्य तय करते समय व्यवहार में बेहतर परिणाम हासिल करने की कोशिश की जाएगी।

वैश्विक चुनौतियां और व्यापार पर असर

रिपोर्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर मुक्त व्यापार पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका के साथ व्यापार तनाव भी चीन की चिंता का कारण बना हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण चीन के निर्यात पर असर पड़ा है। हालांकि चीन ने अमेरिका के अलावा अन्य देशों के साथ अपने व्यापार को बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन पूरी तरह से नुकसान की भरपाई अभी नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय माहौल में अनिश्चितता और बढ़ते तनाव का सीधा असर चीन जैसी निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

घरेलू मोर्चे पर मांग कमजोर

घरेलू स्तर पर भी चीन की अर्थव्यवस्था कई समस्याओं से जूझ रही है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि देश में सप्लाई मजबूत है, लेकिन मांग कमजोर बनी हुई है। यानी उत्पादन तो हो रहा है, लेकिन लोगों की खरीदने की क्षमता और इच्छा उतनी मजबूत नहीं है। प्रॉपर्टी सेक्टर में लंबे समय से चल रही मंदी ने भी अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि वह पारंपरिक विकास मॉडल से आगे बढ़कर नए विकास इंजन तैयार करे। पहले चीन की वृद्धि का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट और भारी निवेश पर आधारित था, लेकिन अब सरकार अर्थव्यवस्था को तकनीक, नवाचार और घरेलू खपत की ओर मोड़ना चाहती है।

पांच वर्षीय योजना पर भी जोर

इस साल का संसदीय सत्र एक नई पांच वर्षीय योजना को भी मंजूरी देगा, जो 2030 तक की नीतिगत प्राथमिकताओं को तय करेगी। सरकार का कहना है कि विकास लक्ष्य को एक दायरे में रखने से उसे नीतियों में बदलाव और सुधार के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह साल नई पांच वर्षीय योजना का पहला वर्ष है, इसलिए संरचनात्मक सुधार, जोखिम नियंत्रण और आर्थिक बदलाव के लिए कुछ लचीलापन जरूरी है।

तकनीक और आत्मनिर्भरता पर फोकस

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि चीन घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहता है। राष्ट्रपति Xi Jinping की महत्वाकांक्षा है कि चीन को तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी देश बनाया जाए। इसके लिए सरकार रिसर्च, हाई-टेक इंडस्ट्री और उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की योजना बना रही है। कुल मिलाकर, चीन ने इस साल के लिए सावधानी भरा लेकिन व्यावहारिक आर्थिक लक्ष्य तय किया है। सरकार का मानना है कि संतुलित और स्थिर विकास के जरिए आने वाले वर्षों में मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है, ताकि भविष्य में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित हो सके।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article