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टैक्स बचाने के लिए खुद बदलें सैलेरी का स्ट्रक्चर, ये 8 तरीके आएंगे काम

बहुत कम लोग जानते हैं कि सैलेरी पाने वाले लोग अपने सैलेरी स्ट्रक्चर में बदलाव करके टैक्स बचा सकते हैं। ये सुविधा खुद कंपनी वित्त वर्ष की शुरुआत में देती है। इस तरह काफी टैक्स बचाया जा सकता है।

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टैक्स बचाने के लिए सैलेरी स्ट्रक्चर बदलें

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • टैक्स बचाने के लिए करें सैलेरी स्ट्रक्चर में बदलाव
  • कंपनी देती है सैलेरी स्ट्रक्चर में बदलाव की सुविधा
  • आप अपने सैलेरी स्ट्रक्चर में टैक्स सेविंग्स ऑप्शन कर सकेंगे शामिल

Tax Saving Tips : क्या आप जानते हैं कि बहुत सी कंपनियां अपने कर्मचारियों को उनकी सीटीसी में बदलाव करने की सुविधा देती हैं। ऐसा किसी भी वित्त वर्ष की शुरुआत में किया जाता है। ऐसा इसलिए ताकि कर्मचारी अपने सैलेरी स्ट्रक्चर में बदलाव करके उनमें टैक्स बचाने वाले ऑप्शन शामिल कर सके। यहां ऐसे 8 तरीके हम आपको बताएंगे, जिन्हें अपने सैलेरी स्ट्रक्चर में शामिल करके आप भी टैक्स बचा सकेंगे।

फ्यूल, ट्रेवल रीइंबर्समेंट और ड्राइवर की सैलेरी

यदि काम के लिए आप टैक्सी से यात्रा करें तो पूरा खर्च टैक्स फ्री रहेगा। यदि ऑफिस के काम के लिए आप अपनी या कंपनी के वाहन को यूज करें तो फ्यूल और मैंटेनेंस के खर्चों के लिए क्लेम कर सकते हैं। यदि गाड़ी का उपयोग निजी उद्देश्य के लिए भी करें तो 1.6 लीटर से कम इंजन वाली कारों के लिए 2,700 रुपये और बड़ी कारों के लिए 3,300 रुपये प्रति माह राशि के लिए क्लेम किया जा सकता है। इसी तरह ड्राइवर की सैलेरी पर 9000 रु प्रति माह राशि के लिए क्लेम किया जा सकता है।

लीव ट्रेवल एसिसटेंस (एलटीए) और मूवेबल एसेट्स

चार साल के ब्लॉक में दो बार क्लेम करने पर वैकेशंस के दौरान परिवार के ट्रेवल एक्सपेंस का रीइंबर्समेंट टैक्स फ्री होता है। पर एलटीए को साल की शुरुआत में सीटीसी का हिस्सा बनाना जरूरी है। इसके अलावा धारा 17(2) के तहत, कंपनी के नाम से खरीदे गए और पर्सनल यूज के लिए कर्मचारी को दिए गए गैजेट और बाकी इंस्ट्रूमेंट्स की केवल 10 वैल्यू पर टैक्स लगाया जाता है। वहीं कंप्यूटर पर कोई टैक्स नहीं लगता।

इंटरनेट, फोन बिल्स और न्यूज पेपर्स-मैगजीन

यदि कर्मचारी बिल का भुगतान करे तो उसे इंटरनेट और फोन बिल पर टैक्स छूट मिलती है। इसी तरह बिल पेश करके अखबार और मैगजीन पर किए गए खर्च पर भी टैक्स छूट मिलेगी।

मील कूपन और नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) का योगदान

आप प्रति भोजन (हर मील पर) 50 रु (महीने के करीब 2200 रु) की टैक्स बचत कर सकते हैं। आखिर में है एनपीएस का योगदान। कई कंपनियां इसकी पेशकश करती हैं। रिटायरमेंट फंड बनाते समय यह तरीका टैक्स को काफी कम कर सकता है। धारा सीसीडी(2) के तहत एनपीएस में जमा की गयी मूल वेतन की 10 फीसदी तक राशि टैक्स फ्री रहती है।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

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