बता दें कि ई-अपील स्कीम के तहत जॉइंट कमिश्नर (अपील) के सामने ये शिकायतें पहुंचेंगी। फिर वे इन अपीलों को निपटाएंगे या उनका आवंटन और उन्हें ट्रांसफर भी कर सकेंगे। इस प्रोसेस से टीडीएस और टीसीएस से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी।
वीडियो के जरिए होगी सुनवाई
जॉइंट कमिश्नर (अपील) के पास कारण बताओ नोटिस जारी करने और संबंधित कानूनों के तहत जुर्माना लगाने का भी अधिकार होगा। मगर फिजिकल मीटिंग न होने के चलते उन्हें समन जारी करने की अथॉरिटी नहीं होगी। दरअसल अपीलकर्ता पर्सनल सुनवाई की अपील वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए होगी।
टैक्स अधिकारियों द्वारा जारी किए गए एसेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ अपीलकर्ता अपने मामले के निपटारे के लिए कहीं से भी अप्लाई कर सकेंगे और सुनवाई में शामिल हो सकेंगे।
टैक्सपेयर्स को मिलेगी राहत
ई-अपील स्कीम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शामिल होगी। इस तकनीक का फायदा उठाते हुए स्कीम का मकसद अपील प्रोसेस में उलझे टैक्यपेयर्स को सुविधा देना और उनके लिए एक्सेसिबिलिटी को बढ़ाना है। इससे टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स ऑफिस नहीं जाना होगा।
केंद्र सरकार ने किया फाइनेंस बिल में बदलाव
केंद्र सरकार ने पहले ही आयकर अधिनियम में नए जॉइंट कमिश्नर (अपील) को शामिल करने के लिए फाइनेंस बिल में संशोधन कर दिया है। सीबीडीटी इस उद्देश्य के लिए आयकर विभाग के जॉइंट कमिश्नर के पद पर लगभग 100 लोगों को तैनात करेगी।
अपीलों के निष्पक्ष आवंटन या ट्रांसफर के लिए Director General of Income-tax (Systems) एक रेंडमाइज्ड प्रोसेस डेवलप करेंगे, जिसके जरिए जॉइंट कमिश्नर (अपील) को अपील असाइन की जाएगी।
