इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन चल रहा है और सभी टैक्सपेयर्स समय रहते अपना रिटर्न दाखिल करने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन कई बार कुछ टैक्सपेयर्स के मन में एक बड़ा डर होता है कि अगर वे किसी वजह से पिछले साल (या बीते कुछ सालों में) अपना आईटीआर भरना भूल गए थे, तो क्या इस साल का उनका टैक्स रिफंड (Income Tax Refund) सरकार द्वारा रोक लिया जाएगा? क्या पुरानी गलती का खामियाजा इस बार के रिफंड पर पड़ेगा? अगर आप भी इस उलझन में हैं, तो राहत की बात यह है कि आयकर कानून में आपके लिए कानूनी रास्ते खुले हुए हैं। आइए जानते हैं टैक्स विभाग के नियम इस बारे में क्या कहते हैं और आपके पास क्या ऑप्शंस हैं।
क्या पिछला रिटर्न न भरने से इस बार का रिफंड रुकेगा?
सीधा जवाब है नहीं, केवल पिछला रिटर्न मिस होने की वजह से चालू वित्त वर्ष का आपका टैक्स रिफंड सीधे तौर पर खारिज या कैंसल नहीं होता है। अगर इस साल आपकी आय टैक्स स्लैब के अनुसार सही है और आपका टीडीएस (TDS) ज्यादा कटा है, तो आप इस साल का रिफंड क्लेम करने के हकदार हैं। हालांकि, यदि पिछले साल का आपका कोई टैक्स बकाया (Tax Demand) निकला हुआ है, तो आयकर विभाग इस साल के रिफंड को उस पुराने बकाये के साथ एडजस्ट (सेट-ऑफ) जरूर कर सकता है। लेकिन अगर आपका कोई टैक्स बाकी नहीं था और सिर्फ रिटर्न छूटा था, तो नए रिफंड में कोई दिक्कत नहीं आती।
पुराना रिफंड पाने का कानूनी रास्ता: धारा 119(2)(b)
अब सवाल उठता है कि जो पुराना रिटर्न छूट गया था, क्या उसका टैक्स रिफंड हमेशा के लिए डूब गया? इसका जवाब है—नहीं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) टैक्सपेयर्स को अपनी गलती सुधारने का मौका देता है। आयकर अधिनियम की धारा 119(2)(b) के तहत आप 'कंडोनेशन ऑफ डिले' (Condonation of Delay यानी देरी के लिए माफी) की अर्जी दे सकते हैं। अगर आपके पास पुराना रिटर्न न भर पाने का कोई जायज और ठोस कारण (जैसे गंभीर बीमारी, दुर्घटना या कोई बड़ी मजबूरी) है, तो आप इस धारा के तहत टैक्स विभाग से पुराना रिटर्न दाखिल करने और रुके हुए रिफंड को जारी करने की गुहार लगा सकते हैं।
सीबीडीटी (CBDT) के नए नियम और समय-सीमा
टैक्स विभाग के नियमों के मुताबिक, आप असेसमेंट ईयर (Assessment Year) खत्म होने के बाद अगले 5 सालों के भीतर ही देरी से रिफंड क्लेम करने की यह अर्जी दे सकते हैं। इस अर्जी को स्वीकार करने के लिए अधिकारियों की वित्तीय सीमाएं (Monetary Limits) तय हैं। यदि आपका पुराना रिफंड क्लेम ₹10 लाख तक का है, तो इसकी मंजूरी प्रिंसिपल कमिश्नर या कमिश्नर दे सकते हैं। ₹10 लाख से ₹50 लाख तक के मामले चीफ कमिश्नर के पास जाते हैं, और यदि रिफंड की रकम ₹50 लाख से अधिक है, तो सीधे सीबीडीटी (CBDT) इस पर फैसला लेता है।
अर्जी देते समय इन बातों का रखें खास ख्याल
अगर आप धारा 119(2)(b) के तहत देरी की माफी के लिए अप्लाई कर रहे हैं, तो आयकर विभाग का पोर्टल (e-Filing Portal) आपको ऑनलाइन सर्विस रिक्वेस्ट रेज करने की सुविधा देता है। आवेदन करते समय आपको अपनी मजबूरी का पूरा विवरण देना होगा और सबूत के तौर पर दस्तावेज (जैसे मेडिकल सर्टिफिकेट या कानूनी कागज) अपलोड करने होंगे। अधिकारी पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही इसे मंजूरी देते हैं। ध्यान रहे कि इस तरह देरी से मिलने वाले रिफंड पर आपको कोई ब्याज (Interest) नहीं दिया जाता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि हर साल 31 जुलाई की तय डेडलाइन से पहले ही अपना ITR दाखिल करें ताकि ऐसी किसी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना ही न पड़े।
