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Cafe Coffee Day: कैफे कॉफी डे को राहत, दिवालिया कार्यवाही पर NCLAT ने लगाई रोक

Cafe Coffee Day: कैफे कॉफी डे, जिसे CCD के नाम भी जाना जाता है, इसकी शुरूआत 1996 में वीजी सिद्धार्थ ने रखी थी। एक समय कमाई करने वाली कंपनी साल 2019 तक 6550 करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गई थी। और कर्ज के तनाव के कारण सिद्धार्थ ने 2019 में नेत्रावदी नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली।

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कैफे कॉफी डे दिवाला कार्यवाही

Cafe Coffee Day:कॉफी रिटेल चेन कैफे कॉफी डे को बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) ने कैफे कॉफी डे चेन का ऑपरेशन करने वाली कॉफी डे एंटरप्राइजेज लिमिटेड (सीडीईएल) के खिलाफ दिवाला कार्यवाही पर बुधवार को अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।अंतरिम आदेश पारित करते हुए अपील अधिकरण की चेन्नई स्थित पीठ ने एनसीएलटी के आदेश के तामील पर रोक लगा दी।

एनसीएलएटी ने सीडीईएल के वित्तीय ऋणदाता आईडीबीआई ट्रस्टीशिप सर्विसेज लिमिटेड (IDBITSL) को कंपनी के प्रस्तुतीकरण पर जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। आईडीबीआईटीएसएल ने 228.45 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट का दावा किया है।

NCLAT ने किस आधार पर लगाई रोक

एनसीएलएटी ने कंपनी के निलंबित निदेशक मंडल की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मालविका हेगड़े द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा और न्यायमूर्ति जतिन्द्रनाथ स्वैन की पीठ ने कहा, कि ऐसी परिस्थितियों में, प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है। सूचीबद्ध होने की अगली तिथि तक, अपीलकर्ता (सीडीईएल) को धारा-7 की प्रक्रियाओं में शामिल करने संबंधी विवादित आदेश को स्थगित रखा जाएगा।

क्या है मामला

एनसीएलटी की बेंगलुरु पीठ ने आईडीबीआई ट्रस्टीशिप सर्विसेज लिमिटेड (आईडीबीआई टीएसएल) द्वारा दायर याचिका को आठ अगस्त को स्वीकार कर लिया था, जिसमें 228.45 करोड़ रुपये की डिफॉल्ट का दावा किया गया था। पीठ ने कर्ज में डूबी कंपनी के परिचालन की देखभाल के लिए एक अंतरिम समाधान पेशेवर की नियुक्ति भी की थी। कैफे कॉफी डे, जिसे CCD के नाम भी जाना जाता है, इसकी शुरूआत 1996 में वीजी सिद्धार्थ ने रखी थी। एक समय कमाई करने वाली कंपनी साल 2019 तक 6550 करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गई थी। और कर्ज के तनाव के कारण सिद्धार्थ ने 2019 में नेत्रावदी नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। उसके बाद उनकी पत्नी और सीईओ मालविका हेगड़े कंपनी को रिवाइव करने की कोशिश कर रही हैं।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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