क्या है मांग
अमेरिकी ऋणदाता के एनसीएलएटी के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की आशंका के बीच बायजू रवींद्रन ने ‘कैविएट’ दायर किया। इसमें अनुरोध किया गया है कि अमेरिकी ऋणदाताओं द्वारा दायर याचिका पर न्यायालय द्वारा कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए।‘कैविएट’ आवेदन किसी वादी द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए दायर किया जाता है कि उसका पक्ष सुने बिना उसके विरुद्ध कोई आदेश पारित न किया जाए।
क्या है मामला
एनसीएलएटी ने अपने फैसले में कहा था कि लेनदारों की समिति (सीओसी) के गठन से पहले ही दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था। साथ ही भुगतान का स्रोत ‘‘विवादित नहीं है’’ और न ही विदेशी धन से संबंधित है, जैसा कि अमेरिकी लेनदारों ने आरोप लगाया है। एनसीएलएटी की दो-सदस्यीय चेन्नई पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि दाखिल हलफनामे को ध्यान में रखते हुए पक्षों के बीच समझौता स्वीकृत किया जाता है। इसके साथ ही एनसीएलटी द्वारा पारित आदेश को रद्द किया जाता है।हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने आगाह किया कि भुगतान करने में कोई भी विफलता बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही को दोबारा शुरू कर देगी।
