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बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत से बड़ी राहत! 6 साल जेल की सजा पर लगी रोक

कभी देश की सबसे वैल्यूएबल यूनिकॉर्न रही एडटेक कंपनी बायजू के फाउंडर बायजू रवींद्रन को बड़ी राहत मिली है। सिंगापुर की अदालत ने उनकी 6 साल की जेल की सजा पर रोक लगा दी है।

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Byju Raveendran

एडटेक (EdTech) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी 'बायजू' (Byju's) के फाउंडर बायजू रवींद्रन (Raveendran Byju) के लिए राहत भरी खबर आई है। सिंगापुर के हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी 6 महीने की जेल की सजा के आदेश पर अंतरिम रोक (Stay Order) लगा दी है। इस फैसले के बाद अब रवींद्रन को सरेंडर करने की जरूरत नहीं होगी और फिलहाल उन पर जेल की कोई कार्रवाई लागू नहीं होगी। अदालती संकटों और वित्तीय विवादों से घिरे बायजू रवींद्रन के लिए इसे एक बड़ी कानूनी और मानसिक राहत माना जा रहा है। 15 जून 2026 तक उन्हें अदालत के सामने सरेंडर करना था, लेकिन इस रोक के बाद उन्हें बड़ी मोहलत मिल गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला असल में एक 'सिविल अवमानना' (Civil Contempt) से जुड़ा हुआ है। मई 2026 के आखिरी हफ्ते में सिंगापुर की एक अदालत ने बायजू रवींद्रन को कोर्ट के आदेशों का पालन न करने का दोषी पाया था। अदालत का कहना था कि रवींद्रन ने अपनी संपत्तियों और विशेषकर 'बीआर इन्वेस्टको प्राइवेट लिमिटेड' (Beeaar Investco Pte) नाम की कंपनी के मालिकाना हक से जुड़े जरूरी दस्तावेज समय पर पेश नहीं किए। इसी वजह से उन पर अदालती अवमानना का केस चला और कोर्ट ने उन्हें 6 महीने जेल की सजा के साथ-साथ करीब 90,000 सिंगापुर डॉलर (लगभग 70,000 अमेरिकी डॉलर) का कानूनी खर्च भुगतने का आदेश दिया था।

सिंगापुर हाई कोर्ट से स्टे मिलने के बाद बायजू रवींद्रन की लीगल टीम (Lazareff Le Bars) ने साफ किया कि यह मामला किसी भी तरह की धोखाधड़ी, पैसों की हेराफेरी या आपराधिक कृत्य से जुड़ा नहीं है। यह विशुद्ध रूप से एक लोन गारंटी और संपत्तियों के खुलासे से जुड़ा दीवानी (Civil) मामला है। रवींद्रन के वरिष्ठ कानूनी सलाहकार जे. माइकल मैकनट ने एक बयान में कहा कि उन्होंने इस सजा के खिलाफ अदालत में अपील दायर कर दी है। उनका मुख्य उद्देश्य इस अवमानना के फैसले को पूरी तरह से रद्द करवाना है। कानूनी टीम का मानना है कि इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था।

क्या है रवीन्द्रन बायजू का कहना?

खुद बायजू रवींद्रन ने इस अदालती रोक का स्वागत किया है और अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि इस पूरे विवाद को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब वे विभिन्न निवेशकों और कर्जदाताओं के साथ बातचीत के जरिए समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, ठीक उसी वक्त इस तरह की अदालती कार्रवाइयां उनके प्रयासों को प्रभावित कर रही हैं। रवींद्रन ने यह भी दावा किया कि उनके या कंपनी के किसी भी फाउंडर ने विवादित फंड का एक भी हिस्सा अपने निजी इस्तेमाल के लिए नहीं लिया है। बल्कि, उनके परिवार ने बीते समय में अपनी 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की व्यक्तिगत संपत्ति वापस कंपनी के संचालन में लगाई है।

यह विवाद कतर होल्डिंग्स (Qatar Investment Authority की सहायक कंपनी) द्वारा दायर की गई एक याचिका से जुड़ा है, जिसने बायजू की संकटकालीन स्थिति के दौरान निवेश किया था। बायजू कंपनी पिछले कुछ समय से भारत, अमेरिका और सिंगापुर जैसे कई देशों में कानूनी और वित्तीय मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। भारत में जहां इसकी मूल कंपनी 'थिंक एंड लर्न' (Think & Learn) दिवालियापन (Insolvency) की प्रक्रिया से गुजर रही है, वहीं अमेरिका में भी कर्जदाताओं के साथ इसका बड़ा विवाद चल रहा है।

इस चौतरफा कानूनी संकट के बीच सिंगापुर की अदालत से मिला यह स्टे ऑर्डर बायजू रवींद्रन के लिए डूबते को तिनके का सहारा जैसा है। हालांकि, उनके ऊपर से पूरी तरह संकट टला नहीं है क्योंकि मुख्य मामले की सुनवाई और अपील पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है। फिर भी, तत्काल जेल जाने और सरेंडर करने के दबाव से मुक्ति मिलने के कारण रवींद्रन अब अपनी कंपनी के ऋण समझौतों और निवेशकों के साथ चल रही सेटलमेंट वार्ताओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। स्टार्टअप जगत की इस सबसे बड़ी गिरावट की कहानी में यह नया मोड़ आगे क्या रूप लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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