Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी 2024 को लोकसभा में बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट इस साल होने वाले आम चुनाव की वजह से अंतरिम बजट होगा। नई सरकार के गठन के बाद पूर्ण बजट पेश किया जाएगा। लेकिन बजट में बहुत कुछ समान होता है। इसमें प्रयोग होने वाले शब्द करीब-करीब एक जैसे ही होते हैं। यहां जानिए कौन-कौन से शब्दों इस्तेमाल किया जाता है। आप भी एक्सपर्ट बन सकते हैं।
नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime)
नई टैक्स रिजीम 2022 में पेश किया गया। सात टैक्स स्लैब के साथ रियायती दरों की पेशकश की गई। लेकिन अधिकांश टैक्स कटौती को समाप्त कर दिया गया। वित्त वर्ष 2023-24 में डिफॉल्ट बना दिया गया।
ओल्ड टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime)
ओल्ड टैक्स रिजीम में चार टैक्स स्लैब वाली व्यवस्था है। नई व्यवस्था में चरणबद्ध तरीके से सभी टैस्स कटौती की पेशकश, 10 लाख से ऊपर की आय पर 30% की उच्च टैक्स दर है।
टैक्स पर सरचार्ज (Surcharge on Tax)
50 लाख से अधिक आय पर लागू होता है। 30% टैक्स दर पर 10% सरचार्ज लगाया जाता है, जिससे कुल टैक्स देनदारी 33% तक बढ़ जाती है।
टैक्स पर सेस (Cess on Tax)
स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए सरचार्ज सहित आयकर पर 4% लेवी लगता है। तब तक जारी रहता है जब तक सरकारी उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता।
टैक्स कटौती सेक्शन 80सी के तहत टैक्स कटौती (Tax Deduction Section 80C)
टैक्स योग्य आय को किसी खास राशि से कम करने का अवसर देता है। उदाहरण के लिए 50,000 रुपए की मानक कटौती या पीपीएफ, एनएससी, एफडी और टैक्स-बचत जैसे निवेशों के लिए 1,50,000 रुपए तक टैक्स कटौती छूट मिलती रहे।
स्रोत पर टैक्स कटौती (TDS)
आय के स्रोत पर टैक्स का संग्रह होता है उदाहरण के लिए बैंक ब्याज आय पर टैक्स काटते हैं या कंपनियां लाभांश आय पर टैक्स काटती हैं।
स्रोत पर टैक्स संग्रह (Tax Collection at Source)
बिक्री के समय विक्रेता द्वारा खरीदार से एकत्र किया गया अतिरिक्त टैक्स ऑथरिटी के पास जमा किया जाता है। उदाहरण के लिए 7 लाख से से अधिक रिमिटेंस पर 20% टीसीएस लग सकता है।
वर्चुअल डिजिटल एस्सेट (Virtual Digital Assets)
वर्चुअल डिजिटल एस्सेट 2022 में पेश की गई। इसमें बिटकॉइन, एथेरियम और डॉगकॉइन जैसी डिजिटल मुद्राएं शामिल हैं। बिक्री या खरीद पर 1% टीडीएस और पूंजीगत लाभ पर 30% टीडीएस के अधीन है।
टैक्स बचत उपकरण (Tax Saving Instruments)
पीपीएफ, एनएससी और एनपीएस जैसे उपकरण जो टैक्सपेयर्स को कटौती का दावा करने की अनुमति देते हैं। ध्यान दें कि नई टैक्स व्यवस्था में अनुमति नहीं है।
छूट (Rebate)
कुल आयकर में कमी, टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स का बोझ कम करके आर्थिक गतिविधि को प्रोत्साहित किया जाता है।
