1 फरवरी 2026 को आने वाले आम बजट 2026 से पहले देश के करोड़ों मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों की उम्मीदें आसमान पर हैं। हर साल की तरह इस बार भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आयकर (Income Tax) की दरों में कोई राहत मिलेगी? ताजा रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स के सुझावों की मानें तो, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को और भी ज्यादा आकर्षक और 'पावरफुल' बनाने की तैयारी में हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि टैक्सपेयर्स को पुरानी रिजीम के जटिल निवेशों से निकालकर नई रिजीम की सरलता की ओर लाया जाए, लेकिन इसके लिए कुछ खास कटौतियों (Deductions) को जोड़ना जरूरी हो गया है।
न्यू टैक्स रिजीम को 'सुपर' बनाने का सरकार का मास्टरप्लान
अब तक कई टैक्सपेयर्स पुरानी टैक्स रिजीम को केवल इसलिए चुनते थे क्योंकि वहां होम लोन के ब्याज और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट मिलती थी। सरकार इस अंतर को खत्म करना चाहती है। बजट 2026 में ऐसी संभावना है कि नई टैक्स रिजीम के भीतर ही कुछ चुनिंदा छूटों को शामिल किया जाए। इससे न केवल टैक्स फाइल करना आसान होगा, बल्कि करदाताओं की शुद्ध बचत (In-hand Savings) में भी भारी इजाफा होगा।
हेल्थ इंश्योरेंस: बीमारी के खर्च से मिलेगी बड़ी राहत
देश में मेडिकल महंगाई जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उसने मिडिल क्लास की कमर तोड़ दी है। हेल्थ इंश्योरेंस अब विलासिता नहीं बल्कि जरूरत बन गया है। एक्सपर्ट्स ने सुझाव दिया है कि नई टैक्स रिजीम में भी सेक्शन 80D जैसी राहत दी जाए। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो खुद के और परिवार के हेल्थ प्रीमियम पर ₹25,000 से ₹50,000 तक की अतिरिक्त छूट मिल सकती है। यह कदम न केवल टैक्स बचाएगा, बल्कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा लेने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा।
होम लोन से अपना घर होगा अब और भी सस्ता
रियल एस्टेट सेक्टर और घर खरीदारों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद सेक्शन 24(b) को लेकर है। वर्तमान में नई रिजीम में होम लोन के ब्याज पर कोई छूट नहीं मिलती। सरकार इस बजट में नई रिजीम अपनाने वालों को भी होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट देने पर विचार कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो शहर में घर खरीदने का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह किसी बड़ी लॉटरी से कम नहीं होगा।
स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी की मांग
नौकरीपेशा लोगों के लिए ₹50,000 का वर्तमान स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) अब छोटा लगने लगा है। महंगाई की दर को देखते हुए इसे बढ़ाकर ₹75,000 या ₹1 लाख करने की प्रबल संभावना है। यह एक ऐसा बदलाव होगा जो सीधे तौर पर हर सैलरीड क्लास व्यक्ति की टैक्स देनदारी को कम कर देगा।
