बजट 2026 से मिडिल क्लास को क्या हैं उम्मीदें? नया टैक्स कानून कितना अहम
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 2, 2026, 01:37 PM IST
Budget 2026 Expectations: बजट 2026 पेश करने की तारीख धीरे-धीरे करीब आ रही है, टैक्स नीति को अब केवल राजस्व जुटाने तक सीमित नहीं रहकर स्थिरता, प्रशासनिक अनुशासन और संस्थागत विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए। हाल के वर्षों में मजबूत टैक्स कलेक्शन और डायरेक्ट टैक्स की बड़ी हिस्सेदारी के चलते अब सरकार के पास भविष्य की प्लानिंग, विवाद कम करने और प्रशासन की गुणवत्ता सुधारने का अवसर है। आइए जानते हैं इस बजट से क्या उम्मीदें हैं।
बजट 2026: टैक्स स्लैब सुधार, 80C सीमा बढ़ोतरी और नई आयकर व्यवस्था (तस्वीर-istock)
Budget 2026 Expectations : जैसे-जैसे यूनियन बजट 2026 करीब आ रहा है, टैक्स नीति को अब केवल राजस्व जुटाने तक सीमित न रखकर स्थिरता, प्रशासनिक अनुशासन और संस्थागत विश्वसनीयता पर केंद्रित करने की मांग तेज हो गई है। हाल के वर्षों में टैक्स कलेक्शन बढ़ा है और कुल टैक्स राजस्व में डायरेक्ट टैक्स की हिस्सेदारी 50% से अधिक हो चुकी है। ऐसे में सरकार के पास अब यह अवसर है कि वह टैक्सपेयर्स को राहत देने के साथ-साथ टैक्स सिस्टम को सरल और विवाद-मुक्त बनाए।
बजट 2026 की पृष्ठभूमि
पिछले बजट में सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था (New Regime) के तहत बड़ी राहत देते हुए बिना टैक्स वाली आय सीमा को 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया था। इसी कारण यह माना जा रहा है कि इस साल छोटे और मिडिल आय वर्ग के लिए कोई बड़ी नई राहत मिलने की संभावना कम है। हालांकि टैक्स सिस्टम को अधिक सरल और भरोसेमंद बनाने की उम्मीदें बनी हुई हैं।
नया टैक्स कानून 2025 और बदलाव
1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होगा। इसी वजह से बजट 2026 को बेहद अहम माना जा रहा है। टैक्सपेयर्स और एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि नए कानून के साथ टैक्स स्लैब, दरें और नियम स्पष्ट हों, ताकि भविष्य में विवाद और अनिश्चितता कम हो।
मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ
मिडिल क्लास को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि मौजूदा हाई टैक्स स्लैब उन्हें जल्दी प्रभावित करने लगते हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिडिल इनकम ग्रुप के लिए टैक्स स्लैब को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए, ताकि उनकी बचत और खर्च करने की क्षमता बढ़े।
सरचार्ज और कैपिटल गेन क्या हो?
एक्सपर्ट के मुताबिक सरचार्ज की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। 50 लाख रुपये की सीमा को 75 लाख रुपये तक करने और 1 करोड़ रुपये की सीमा को 1.5 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, लिस्टेड सिक्योरिटीज पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की छूट सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की भी मांग है। इससे निवेशकों को राहत मिलेगी।
पुरानी टैक्स व्यवस्था पर खतरा!
सरकार नई टैक्स व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गलत कटौतियों और दावों के कारण सरकार पुराने टैक्स सिस्टम को आंशिक या पूरी तरह खत्म कर सकती है। नई व्यवस्था में बिना ज्यादा छूट के भी प्रभावी टैक्स दर कम है, जिससे सरकार इसे आगे बढ़ाना चाहती है।
LLP और कंपनियों के लिए अपेक्षाएं
एलएलपी (LLP) के लिए मांग है कि उनकी टैक्स दरें कंपनियों के बराबर की जाएं। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए टैक्स दरें और कम करने की उम्मीद है, ताकि मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती मिल सके और निवेश को बढ़ावा मिले।
टैक्स स्लैब और सीनियर सिटीजन्स
टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक सीनियर सिटीजन्स के लिए टैक्स स्लैब में सुधार किया जाना चाहिए। ब्याज दरें घटने के कारण उनकी आय पहले ही प्रभावित हो रही है। साथ ही, 30% टैक्स स्लैब की सीमा को 24 लाख रुपये से बढ़ाकर 35 लाख रुपये करने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन और 80C की सीमा
सैलरीड कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 1 लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग है। इसके अलावा, सेक्शन 80C के तहत मिलने वाली छूट सीमा को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की भी उम्मीद है। इससे टैक्सपेयर्स को बचत के लिए अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।
बजट 2026 से टैक्सपेयर्स को बहुत बड़ी राहत की उम्मीद भले न हो, लेकिन एक स्थिर, सरल और भरोसेमंद टैक्स सिस्टम की अपेक्षा जरूर है। नए इनकम टैक्स कानून के साथ अगर टैक्स स्लैब और नियमों को तर्कसंगत बनाया गया, तो यह मिडिल क्लास, सीनियर सिटीजन्स और कारोबार सभी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
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