बजट 2026 से हेल्थ सेक्टर को उम्मीदें, डिजिटल इनोवेशन, मेक इन इंडिया पर हो फोकस
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 20, 2026, 12:12 PM IST
Budget 2026 Expectations: आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल सेक्टर में उम्मीदें बढ़ गई हैं। विशेषज्ञ सरकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च बढ़ाने, जीएसटी सुधार और डिजिटल हेल्थ व रिसर्च को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। उद्योग जगत मानता है कि यह बजट भारत के हेल्थ सिस्टम को नई दिशा दे सकता है।
बजट 2026-27 से उम्मीदें (तस्वीर-istock)
Budget 2026 Expectations: 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश होने वाला है और इस बार स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल सेक्टर में काफी उम्मीदें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट भारत के हेल्थ सिस्टम को मजबूत और सुलभ बनाने का अवसर है। हेल्थ सेक्टर से जुड़े लोग सरकार से ज्यादा सार्वजनिक खर्च, जीएसटी सुधार और डिजिटल हेल्थ व रिसर्च को बढ़ावा देने की मांग कर रहे हैं। आईएएनएस के मुताबिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच सुधारने के लिए सरकारी खर्च को जीडीपी के 3 से 5 फीसदी तक बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल यह खर्च काफी सीमित है। वहीं, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का बोझ लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 65 फीसदी मौतें एनसीडी के कारण होती हैं। इस वजह से हेल्थ सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत इस समय ऐसे मोड़ पर है, जहां नीतियों का सही क्रियान्वयन बेहद जरूरी है। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च को कम से कम 2.5 फीसदी से ऊपर ले जाने की सलाह दी है ताकि भविष्य में एक मजबूत और टिकाऊ हेल्थ सिस्टम तैयार किया जा सके।
जीएसटी सुधार और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा
2025 में मेडिकल डिवाइसेज और डायग्नोस्टिक किट्स पर जीएसटी घटाकर 5 फीसदी किया गया था, जो एक बड़ा कदम था। लेकिन अब कुछ उपकरणों पर जीएसटी ज्यादा है, जैसे रेडिएशन प्रोटेक्शन से जुड़े उपकरणों पर 18 फीसदी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे घटाकर 5 फीसदी किया जाना चाहिए। इससे घरेलू निर्माताओं को मदद मिलेगी और इलाज की लागत भी कम होगी।
इसके अलावा, भारत की करीब 80 फीसदी मेडिकल डिवाइसेज आयात पर निर्भर हैं। बजट में ‘बाय इंडिया’ पहल को मजबूत करने की भी मांग की जा रही है। इसके लिए रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देने वाली योजनाओं, जैसे पीआरआईपी स्कीम, को और प्रभावी बनाना जरूरी है। इससे देश में उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरण बन सकेंगे।
ग्रामीण और टियर-2, टियर-3 शहरों में स्वास्थ्य ढांचा
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। इन जगहों पर डायग्नोस्टिक हब और आई हॉस्पिटल्स के निर्माण के लिए प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए, जैसे प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) और गैप वायबिलिटी फंडिंग (VGF)। इसका लक्ष्य सस्ती और गुणवत्तापूर्ण हेल्थकेयर हर व्यक्ति तक पहुंचाना है।
डिजिटल हेल्थ और एआई से नई उम्मीदें
डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और IoT आधारित मॉनिटरिंग को लेकर भी विशेषज्ञों की बड़ी उम्मीदें हैं। एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बीमारियों की पहचान जल्दी हो सकती है। इससे इलाज ज्यादा प्रभावी और सस्ता होगा। हेल्थ सिस्टम रिएक्टिव की बजाय प्रिवेंटिव मॉडल की तरफ बढ़ेगा। इसके अलावा, डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मेसी, डायग्नोस्टिक्स और होम केयर सेवाओं का एकीकरण मरीजों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा सकता है। हेल्थटेक इनोवेशन को बढ़ावा देने से इलाज की गुणवत्ता और अनुभव दोनों में सुधार होगा।
उम्मीदें जमीन पर असर दिखाने वाली
कुल मिलाकर, हेल्थ सेक्टर चाहता है कि बजट 2026-27 में सिर्फ घोषणाएं नहीं बल्कि वास्तविक बदलाव दिखें। ज्यादा सरकारी खर्च, बेहतर नीतियां, डिजिटल तकनीक और स्थानीय उत्पादन के सहारे भारत एक मजबूत, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार हेल्थ सिस्टम की ओर तेजी से बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट हेल्थ सेक्टर के लिए नई दिशा तय कर सकता है।
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