बजट 2026: FICCI को बजट से उम्मीदें, टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाने पर हो फोकस
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 14, 2026, 12:54 PM IST
Budget 2026 Expectations: देश के प्रमुख औद्योगिक निकाय FICCI ने आम बजट 2026-27 के लिए अपनी उम्मीदें शेयर कीं। इसमें डायरेक्ट टैक्स और सीमा शुल्क से जुड़े सुझाव शामिल हैं। FICCI ने कहा कि इनकम टैक्स आयुक्त अपील के सामने पेंडिंग मामलों को कम करना जरूरी है, ताकि नया फेसलेस अपील सिस्टम सफल हो और टैक्सपेयर्स को डिमांड और रिफंड ब्लॉक होने की समस्याओं से राहत मिले।
FICCI ने 2026-27 के बजट पर उठाए महत्वपूर्ण सुझाव (तस्वीर-istock)
Budget 2026 Expectations : देश के प्रमुख औद्योगिक निकाय FICCI ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट से जुड़े अपने सुझाव साझा किए। इनमें मुख्य रूप से डायरेक्ट और सीमा शुल्क संग्रह से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। एफआईसीसीआई ने कहा कि आयकर मामलों में लंबित बकाया को कम करना और नए फेसलेस अपील सिस्टम को सफल बनाना जरूरी है, ताकि करदाताओं को डिमांड और रिफंड ब्लॉक होने जैसी समस्याओं से राहत मिल सके।
पेंडिंग टैक्स मामलों की समस्या
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक एफआईसीसीआई के बयान के अनुसार, वर्तमान में आयकर आयुक्त अपील के सामने बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। 1 अप्रैल 2025 तक करीब 5.4 लाख मामले अटके हुए थे, जिनमें करीब 18.16 लाख करोड़ रुपए की राशि शामिल है। यह न केवल कंपनियों के लिए परेशानी का कारण बनता है, बल्कि सरकार के लिए भी राजस्व हानि का कारण है।
एफआईसीसीआई ने बताया कि 2025-26 के लिए सेंट्रल एक्शन प्लान (CAP) का लक्ष्य 2 लाख मामलों का निपटारा करना और अलग-अलग शुल्कों जैसे इंटरनेशनल टैक्स, ट्रांसफर प्राइसिंग, सेंट्रल फेसलेस अपील और JCIT अपील के तहत 10 लाख करोड़ रुपए की विवादित राशि का निपटारा करना है। लेकिन बिना क्षमता बढ़ाए या अलग ट्रैक और टाइमलाइन तय किए, यह बैकलॉग खत्म करना कठिन होगा।
कंपनियों और निवेशकों पर असर
एफआईसीसीआई ने कहा कि पेंडिंग मुकदमे कंपनियों की पुस्तकों में कंटिंजेंट लायबिलिटी के रूप में दिखाई देते हैं। इसका असर निवेशकों पर भी पड़ता है। उदाहरण के लिए, भारतीय प्रमोटर जब विदेशी निवेशकों को शेयर बेचते हैं, तो पेंडिंग मामलों के कारण शेयरों का मूल्य कम आंका जाता है। इस तरह, न केवल कंपनियों को नुकसान होता है, बल्कि सरकार को भी कर संग्रह में कमी का सामना करना पड़ता है।
एफआईसीसीआई ने सुझाव दिया कि मुकदमेबाजी में फंसी राशि को निकालने, टैक्सपेयर्स के वर्किंग कैपिटल ब्लॉकेज को आसान बनाने और रेवेन्यू कलेक्शन पर असर डाले बिना अपील के दौरान डिमांड को रोकने की सुविधा के प्रावधानों को तर्कसंगत बनाना चाहिए। इससे करदाताओं और सरकार दोनों को लाभ होगा।
सीमा शुल्क नियमों में सुधार की मांग
एफआईसीसीआई ने सीमा शुल्क नियमों में भी बदलाव की जरूरत जताई। औद्योगिक निकाय ने कहा कि एडवांस रूलिंग (AAAR) कार्यालयों का विस्तार किया जाना चाहिए। इससे अग्रिम निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और व्यापारियों के लिए निश्चितता बढ़ेगी। इसके अलावा, सेल्फ-डिक्लेरेशन एक्सटेंशन की अनुमति देने से व्यापार में स्पष्टता आएगी, अनुपालन का बोझ कम होगा और सीमा शुल्क मामलों में मुकदमेबाजी घटेगी। फिलहाल, सीएएआर के ऑफिस सिर्फ नई दिल्ली और मुंबई में हैं और पूरे भारत का क्षेत्रीय अधिकार इन दो कार्यालयों में बंटा हुआ है। यह स्थिति तब है जब देश के दक्षिण और पूर्वी बंदरगाहों जैसे चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता से काफी संख्या में आवेदन आते हैं।
एफआईसीसीआई का मुख्य संदेश
एफआईसीसीआई ने स्पष्ट किया कि टैक्स अपील और सीमा शुल्क नियमों में सुधार से न केवल करदाताओं के लिए प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि सरकार को राजस्व संग्रह में स्थिरता भी मिलेगी। लंबित मामलों का निपटारा करदाताओं की वर्किंग कैपिटल और निवेश निर्णयों पर सकारात्मक असर डालेगा। वहीं, सीमा शुल्क नियमों में सुधार से व्यापार में सुगमता और विवाद कम होंगे।
कुल मिलाकर, एफआईसीसीआई ने बजट 2026-27 के लिए सुझाव देते हुए टैक्स और सीमा शुल्क प्रशासन में पारदर्शिता, समयबद्ध निपटारा और व्यापार के लिए आसान प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। इससे भारत में निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और उद्योगों के लिए व्यापार करना सरल होगा।
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