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Monsoon Health Tips: मानसून में घर की ये 10 जगहें बन सकती हैं इन्फेक्शन का अड्डा, लोग अक्सर भूल जाते हैं यहां की सफाई

Monsoon Health Tips: मानसून के दिनों में हमारा घर वैक्टीरिया का अड्डा बन जाता है। इससे हमारी सेहत को भारी नुकसान होता है। आज हम आपको घर की 10 जगहें बताएंगे जहां मानसून में इंफेक्शन बढ़ सकता है।

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मानसून में बैक्टीरिया का छुपा खतरा

Monsoon Health Tips: मानसून आते ही लोग घर की फर्श, खिड़कियां और बाथरूम तो साफ करते हैं, लेकिन घर के कई ऐसे कोने होते हैं जिन पर महीनों तक किसी का ध्यान नहीं जाता है। नमी, कम धूप और लगातार बढ़ती आर्द्रता इन जगहों को बैक्टीरिया, फंगस, वायरस और कीड़ों के पनपने के लिए परफेक्ट बना देती है। यही वजह है कि बरसात के दिनों में एलर्जी, फंगल इंफेक्शन, सांस संबंधी समस्याएं, पेट के संक्रमण और त्वचा रोगों के मामले बढ़ जाते हैं।

हालांकि अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी जागरूकता और नियमित सफाई से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं घर की उन 10 जगहों के बारे में जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि संक्रमण का बड़ा खतरा यहीं छिपा होता है।

1. किचन सिंक का ड्रेन और पाइप

किचन सिंक चमकता हुआ दिख सकता है, लेकिन उसके ड्रेन के अंदर जमा चिकनाई, खाने के छोटे-छोटे कण और नमी बैक्टीरिया की कॉलोनी बना सकते हैं। मानसून में यह समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि इस मौसम में नमी सूख नहीं पाती है। सप्ताह में कम से कम एक बार गर्म पानी और बेकिंग सोडा या हल्के क्लीनर से ड्रेन की सफाई करें। इसके अलावा सिंक में रातभर गंदे बर्तन छोड़ने से भी बचें।

2. पानी की बोतल और उसका ढक्कन

ज्यादातर लोग अपनी पानी की बोतल को तो समय-समय पर धो लेते हैं लेकिन ढक्कन, रबर रिंग और स्ट्रॉ की सफाई भूल जाते हैं। इन्हीं हिस्सों में फंगस और बैक्टीरिया सबसे तेजी से पनप सकते हैं। अगर स्टील या प्लास्टिक की बोतल रोज इस्तेमाल करते हैं तो उसे प्रतिदिन अच्छी तरह धोएं और सप्ताह में एक बार गहराई से साफ करें।

3. फ्रिज का रबर गैस्केट

फ्रिज का दरवाजा बंद करने वाली रबर स्ट्रिप में नमी और धूल जमा होकर काले फंगस का रूप ले सकती है। यह अक्सर दिखाई भी नहीं देता लेकिन भोजन की स्वच्छता पर असर डाल सकता है। इसे आप गीले कपड़े और हल्के साबुन से नियमित रूप से साफ करें।

4. वॉशिंग मशीन का रबर सील

फ्रंट लोड वॉशिंग मशीन की रबर सील में पानी जमा रह जाता है। अगर मशीन का दरवाजा हर समय बंद रखा जाए तो वहां फंगस और बदबू पैदा हो सकती है। कपड़े धोने के बाद मशीन का दरवाजा कुछ घंटों के लिए खुला छोड़ दें और रबर सील को सूखे कपड़े से पोंछें।

5. टूथब्रश होल्डर

टूथब्रश तो रोज बदलने और साफ रखने की बात होती है, लेकिन उसका स्टैंड महीनों तक बिना साफ किए इस्तेमाल होता रहता है। पानी की बूंदें और टूथपेस्ट का अवशेष बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं। सप्ताह में कम से कम एक बार टूथब्रश होल्डर को धोकर अच्छी तरह सुखाएं।

6. एसी और कूलर के फिल्टर

मानसून में हवा में नमी अधिक होती है। अगर एसी या कूलर के फिल्टर गंदे हैं तो उनमें धूल, फंगस और एलर्जन जमा हो सकते हैं, जो सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। फिल्टर की नियमित सफाई और समय-समय पर सर्विसिंग कराना जरूरी है।

7. डोर हैंडल और स्विच बोर्ड

इन सतहों को पूरा परिवार दिनभर कई बार छूता है, लेकिन सफाई के दौरान अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। डिसइन्फेक्टेंट वाइप या हल्के सैनिटाइजर से सप्ताह में कई बार इन्हें साफ करना संक्रमण के जोखिम को कम कर सकता है।

8. बाथरूम का एग्जॉस्ट फैन

नमी बाहर निकालने वाला एग्जॉस्ट फैन खुद धूल और फफूंद से भर जाता है। यदि यह ठीक से काम नहीं करेगा तो बाथरूम में नमी बनी रहेगी, जिससे फंगस तेजी से फैल सकती है। महीने में कम से कम एक बार इसकी सफाई करें।

9. पर्दों के पीछे और फर्नीचर के नीचे का हिस्सा

इन जगहों पर हवा का प्रवाह कम होता है। बरसात में यहां नमी और धूल मिलकर फफूंद बनने का कारण बन सकती है। समय-समय पर फर्नीचर खिसकाकर सफाई करें और कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें।

10. डस्टबिन और उसका ढक्कन

कई लोग केवल कूड़ा निकाल देते हैं लेकिन डस्टबिन को धोना भूल जाते हैं। गीले कचरे के कारण इसमें बैक्टीरिया और दुर्गंध तेजी से बढ़ते हैं। डस्टबिन को नियमित रूप से साबुन और कीटाणुनाशक से धोएं तथा उसे पूरी तरह सूखने दें।

मानसून में क्यों बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा?

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है और कई जगहों पर धूप कम पहुंचती है। ऐसी परिस्थितियां बैक्टीरिया, फंगस और मोल्ड के तेजी से बढ़ने के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। यदि घर की नियमित सफाई के साथ छिपी हुई जगहों पर भी ध्यान दिया जाए, तो मानसून के दौरान होने वाले कई संक्रमणों और एलर्जी से काफी हद तक बचाव संभव है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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