बजट सत्र 2026 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। इस बार संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने की संभावना है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार देश का बजट पेश करेंगी। खास बात यह है कि इस बार केंद्रीय बजट रविवार, 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स में अधिकारियों के मुताबिक, संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति ने बजट सत्र का संभावित कार्यक्रम तय कर लिया है। इस शेड्यूल के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। हर साल नए सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के पारंपरिक अभिभाषण से होती है।
क्या है शेड्यूल?
हालांकि, 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट समारोह के कारण लोकसभा और राज्यसभा की बैठक नहीं होगी। इसके बाद संसद की बैठक 30 जनवरी को होगी। इसी दिन देश की आर्थिक स्थिति पर आधारित आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने की संभावना है। यह सर्वे बजट से पहले सरकार की आर्थिक तस्वीर सामने रखता है।
31 जनवरी को भी संसद के दोनों सदनों की बैठक नहीं होगी। इसके बाद रविवार, 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह बजट वित्त वर्ष 2026-27 के लिए होगा और इससे सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं का पता चलेगा।
राष्ट्रपति के अभिभाषण और केंद्रीय बजट पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के बाद संसद की बैठक 13 फरवरी को स्थगित कर दी जाएगी। इसके बाद करीब एक महीने का अवकाश रहेगा। संसद का बजट सत्र दोबारा 9 मार्च से शुरू होगा और इसके 2 अप्रैल, गुरुवार को समाप्त होने की संभावना है।
आमतौर पर संसद का सत्र शुक्रवार को खत्म होता है, लेकिन इस बार 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे और उसके बाद वीकेंड होने की वजह से सत्र एक दिन पहले यानी 2 अप्रैल को समाप्त किया जा सकता है।
गौर करने वाली बात यह है कि साल 2016 तक केंद्रीय बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता था। लेकिन 2017 में मोदी सरकार ने बजट पेश करने की तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी। इसका मकसद यह था कि बजट के प्रावधानों को जल्दी लागू किया जा सके और नई वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाए।
निर्मला सीतारमण का रिकॉर्ड
निर्मला सीतारमण पहले ही कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। उन्होंने साल 2021 में भारत का पहला पेपरलेस बजट पेश किया था। उस समय देश में कोरोना महामारी चल रही थी और संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार ने डिजिटल तरीका अपनाया। वित्त मंत्री ने पारंपरिक कागजी बही-खाते की जगह मेड इन इंडिया टैबलेट का इस्तेमाल किया और संसद में पूरी तरह डिजिटल बजट पेश किया।
पेपरलेस बजट के साथ एक नई परंपरा की शुरुआत हुई, जो अब लगातार जारी है। इसके बाद से हर साल बजट डिजिटल फॉर्म में ही पेश किया जा रहा है। इससे न सिर्फ कागज की बचत हुई, बल्कि बजट से जुड़ी जानकारी आम लोगों तक भी तेजी से पहुंचने लगी।
