Budget 2026: टैक्स चोरों को बड़ी राहत, अब इनकम टैक्स चोरी पर नहीं होगी जेल…
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Feb 1, 2026, 01:39 PM IST
बजट 2026 में टैक्सपेयर्स के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'नए इनकम टैक्स एक्ट' के तहत टैक्स चोरी को अपराध की श्रेणी से बाहर (Decriminalization) करने का ऐलान किया है। अब अनजाने में हुई गलती या टैक्स छिपाने पर जेल की हवा नहीं खानी पड़ेगी, बल्कि केवल जुर्माना (Penalty) भरकर मामले को सुलझाया जा सकेगा। सरकार का यह कदम टैक्स सिस्टम से 'डर' खत्म करने और करदाताओं पर भरोसा जताने की दिशा में एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
Tax Evasion Budget 2026
अगर आप इनकम टैक्स के कड़े नियमों, विभाग के नोटिस और कानूनी कार्रवाई के नाम से घबराते थे, तो बजट 2026 आपके लिए एक नई सुबह लेकर आया है। संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ऐसी टैक्स व्यवस्था की नींव रखी है, जो 'डर' पर नहीं बल्कि 'भरोसे' पर टिकी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब टैक्सपेयर्स को अपराधी की नजर से नहीं देखा जाएगा। इस बजट में जेल की सजा खत्म करने से लेकर विदेश यात्रा और प्रॉपर्टी खरीदने तक के नियमों को इतना आसान बना दिया गया है कि आम आदमी की राहें बेहद सुगम हो गई हैं।
जेल जाने का डर खत्म
टैक्सपेयर्स के लिए इस बजट का सबसे क्रांतिकारी ऐलान यह है कि अब इनकम टैक्स से जुड़ी गलतियों के लिए जेल की हवा नहीं खानी पड़ेगी। सरकार ने इनकम टैक्स कानून को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने (Decriminalization) का फैसला किया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले 'नए इनकम टैक्स एक्ट' के तहत, अगर किसी की आय में कोई गड़बड़ी मिलती है या अनजाने में टैक्स छिपाया जाता है, तो उसे सजा के बजाय केवल जुर्माना (Penalty) भरना होगा। जुर्माना भरकर मामले को रफा-दफा किया जा सकेगा। इसके साथ ही, जिन लोगों की विदेशों में अघोषित संपत्ति है, उन्हें सरकार ने अपनी गलती सुधारने के लिए 6 महीने का विशेष समय दिया है। वे एक खास डिस्क्लोजर स्कीम के तहत अपनी संपत्ति की जानकारी देकर कानूनी पचड़ों से बच सकते हैं।
विदेश यात्रा और पढ़ाई हुई सस्ती
मिडिल क्लास परिवारों के लिए, जो अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाना चाहते हैं या साल में एक बार विदेश घूमने का सपना देखते हैं, वित्त मंत्री ने बड़ी राहत दी है। अब तक विदेशी टूर पैकेज या अन्य विदेशी खर्चों पर 5% से लेकर 20% तक का भारी-भरकम टीसीएस (TCS) चुकाना पड़ता था, जिससे बजट बिगड़ जाता था। सरकार ने इसे अब घटाकर सिर्फ 2% कर दिया है। चाहे शिक्षा के लिए पैसे भेजने हों, इलाज का खर्च हो या फिर कोई हॉलिडे पैकेज, अब हर किसी को केवल 2% टीसीएस ही देना होगा, वो भी बिना किसी ऊपरी सीमा (Upper Limit) के।
ITR फाइलिंग में अब गलतियां सुधारना हुआ आसान
अक्सर लोग रिटर्न भरते समय जल्दबाजी में कोई जानकारी देना भूल जाते थे या गलत भर देते थे। पहले इसे सुधारना (Revised Return) एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। अब सरकार ने इसके लिए अतिरिक्त समय देने का ऐलान किया है। अब करदाता मामूली फीस देकर अपने रिटर्न को अपडेट कर सकेंगे। साथ ही, रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन को भी स्पष्ट किया गया है। ITR-1 और ITR-2 के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की गई है, जबकि नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। छोटे करदाताओं के लिए सबसे बड़ी सुविधा यह है कि अब उन्हें 'निल टीडीएस' (Nil TDS) सर्टिफिकेट के लिए अधिकारियों की खुशामद नहीं करनी होगी; यह पूरी प्रक्रिया अब ऑटोमैटिक और डिजिटल हो जाएगी।
प्रॉपर्टी खरीदना और निवेश करना हुआ सिरदर्द मुक्त
रियल एस्टेट में निवेश करने वालों के लिए भी अच्छी खबर है। अब तक अगर आप किसी एनआरआई (NRI) से घर या जमीन खरीदते थे, तो टीडीएस काटने के लिए आपको 'टैन नंबर' (TAN) लेने की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। बजट 2026 में इस नियम को खत्म कर दिया गया है। अब एक आम खरीदार बिना टैन नंबर के भी सीधे टीडीएस काट सकेगा। इसके अलावा, शेयर बाजार और कंपनियों में निवेश करने वालों के लिए फॉर्म 15G और 15H की प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है। अब डिपॉजिटरी ही इन फॉर्म्स को स्वीकार कर कंपनियों तक पहुंचा देंगी, जिससे निवेशकों को हर कंपनी के पास अलग से दौड़ने की जरूरत नहीं होगी।
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