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जहां लगाया पैसा, वहीं नुकसान! BSE 1000 के 65% शेयरों ने गंवाई 3 साल की कमाई

शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए तस्वीर चिंताजनक होती जा रही है। BSE 1000 के 65% शेयरों ने 3 साल में कमाई गंवा दी है, जबकि करीब आधे शेयर 5 साल में भी रिटर्न नहीं दे पाए। बाजार में यह गिरावट व्यापक और गहरी होती दिख रही है।

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BSE 1000 की 65% कंपनियों के शेयर की 3 साल की ग्रोथ हुई जीरो

BSE 1000 इंडेक्स के आंकड़े बताते हैं कि बाजार में कमजोरी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है। करीब 65% कंपनियों का 3 साल का CAGR रिटर्न निगेटिव हो गया है। इनमें 258 शेयरों में 1-10% तक गिरावट दर्ज हुई है, 168 शेयर 10-20% तक टूटे हैं, जबकि 119 शेयरों में 20-50% तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा 119 शेयरों ने इस अवधि में कोई खास रिटर्न नहीं दिया और लगभग फ्लैट रहे।

रिटर्न रेंज (%)शेयरों की संख्या
-1% से -10%258
-10% से -20%168
-20% से -50%119
फ्लैट रिटर्न119
कुल निगेटिव (%)~65%

5 साल की कमाई भी नहीं बची

लंबी अवधि में भी निवेशकों को राहत नहीं मिली है। 5 साल के आधार पर करीब आधे शेयरों ने अपनी कमाई गंवा दी है। 205 कंपनियों में 1-10% गिरावट रही, 95 शेयर 10-20% तक टूटे और 57 शेयरों में 20-50% तक की गिरावट दर्ज हुई। यह संकेत देता है कि लॉन्ग टर्म निवेश भी अब सुरक्षित नहीं रह गया है।

रिटर्न रेंज (%)शेयरों की संख्या
-1% से -10%205
-10% से -20%95
-20% से -50%57
कुल निगेटिव (%)~50%

निफ्टी 100 में भी कमजोरी

बाजार की यह गिरावट केवल छोटे और मिडकैप शेयरों तक सीमित नहीं है। निफ्टी 100 इंडेक्स के करीब 50% शेयर 3 साल में निगेटिव हो चुके हैं, जबकि करीब 30% शेयरों ने 5 साल में भी गिरावट दिखाई है। यह दिखाता है कि बड़े और मजबूत माने जाने वाले शेयर भी दबाव में हैं।

इंडेक्स3-Year निगेटिव (%)5-Year निगेटिव (%)
BSE 1000~65%~50%
Nifty 100~50%~30%
BSE MidCap (150)~50%~50%
BSE SmallCap (250)~65%~50%

मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा नुकसान

ब्रॉडर मार्केट में गिरावट और ज्यादा तेज है। BSE मिडकैप इंडेक्स के करीब 50% शेयर 3 और 5 साल दोनों में निगेटिव हैं। वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स में 3 साल में 65% और 5 साल में करीब 50% शेयरों ने निगेटिव रिटर्न दिया है। इससे साफ है कि हाई रिस्क सेगमेंट में निवेशकों को ज्यादा नुकसान हुआ है।

तेल की कीमत और जियोपॉलिटिक्स बना बड़ा कारण

बाजार पर दबाव के पीछे ग्लोबल फैक्टर प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो हालिया तनाव के बाद करीब 55% बढ़ चुका है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सप्लाई में बाधा ने महंगाई का खतरा बढ़ा दिया है, जिससे केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी असर पड़ रहा है।

FII की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की स्थिति और कमजोर कर दी है। इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 7.8 अरब डॉलर इक्विटी से निकाल लिए हैं, जबकि बॉन्ड मार्केट से भी निकासी देखी गई है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स ने भी भारत पर सतर्क रुख अपनाया है, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ है।

आगे भी रह सकती है वोलैटिलिटी

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार फिलहाल संवेदनशील दौर में है। कच्चे तेल की कीमत, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक ब्याज दरों की दिशा बाजार की चाल तय करेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों को सतर्क रहकर चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह दी जा रही है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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