अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों ने एक बार फिर दुनिया भर की नींद उड़ा दी है। जो ब्रेंट क्रूड पिछले काफी समय से 100 से 102 डॉलर के दायरे में शांत दिख रहा था, उसने अचानक ऐसी रफ़्तार पकड़ी है कि अब यह 111.86 डॉलर के स्तर को पार कर गया है। कच्चे तेल में आई इस अचानक तेजी का सीधा और कड़वा असर हमारी और आपकी जेब पर पड़ने वाला है। जब भी ग्लोबल मार्केट में तेल उबलता है, तो भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का डर गहरा जाता है। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से सब्जी, फल और राशन जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम भी आसमान छूने लगते हैं।
क्यों बढ़ रही है कीमतें?
बाजार में मची इस अफरा-तफरी के पीछे कई बड़े और गंभीर कारण हैं। इस समय पश्चिम एशिया (West Asia) यानी मिडिल ईस्ट में चल रहा भारी तनाव आग में घी डालने का काम कर रहा है। इसके अलावा, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने से पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति चेन टूट गई है। एक तरफ बड़े तेल उत्पादक देश (OPEC+) जानबूझकर उत्पादन में कटौती कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पूरी दुनिया में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है। मांग और सप्लाई के बीच बढ़ता यह अंतर ही कीमतों को $150 के डरावने स्तर की ओर धकेल रहा है।
अगर हम ताजा आंकड़ों पर गौर करें, तो स्थिति की गंभीरता साफ समझ आती है। ब्रेंट क्रूड में केवल एक दिन में 4.17% का भारी उछाल आया है, जिससे इसकी कीमत $111.86 प्रति बैरल पर पहुंच गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले एक महीने में ही तेल की कीमतों में करीब 55.95% की भयंकर बढ़त दर्ज की गई है। अमेरिकी बेंचमार्क (WTI Crude) भी पीछे नहीं है, वह भी $100 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने के बेहद करीब है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट का संकट नहीं थमा, तो $150 का नया रिकॉर्ड बनना अब नामुमकिन नहीं लगता।

Crude Oil Prices
शेयर बाजार भी झुलसा
तेल की इस 'आग' ने दुनिया भर के शेयर बाजारों को झुलसाना शुरू कर दिया है। निवेशकों में डर का माहौल है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है। गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) में आज 2.45% की बड़ी गिरावट देखी गई है, जो दलाल स्ट्रीट के लिए खतरे की घंटी है। अमेरिकी बाजार (Dow Jones) और जापानी बाजार (Nikkei) भी लाल निशान में गोता लगा रहे हैं। जब तेल महंगा होता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ जाती है और उनका मुनाफा कम हो जाता है, यही वजह है कि शेयर बाजार में इस समय हाहाकार मचा हुआ है।
भारत जैसे देश के लिए कच्चा तेल $112 के पार जाना एक बड़ी चुनौती है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल बाहर से खरीदता है। अगर कीमतें $150 तक जाती हैं, तो डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होगा, जिससे आयात (Import) और महंगा हो जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में आपकी ईएमआई (EMI) से लेकर घर के बजट तक, सब कुछ बिगड़ सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तेल उत्पादक देश सप्लाई बढ़ाएंगे या फिर दुनिया को इस नई महंगाई की लहर के साथ जीना होगा।
