क्रिप्टोकरेंसी बाजार में एक बार फिर बड़ा भूकंप आया है। दुनिया की सबसे लोकप्रिय डिजिटल करेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटों में बिटकॉइन करीब 4.8% फिसलकर 65,000 डॉलर के लेवल से भी नीचे आ गया है। इस भारी बिकवाली के कारण क्रिप्टो निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये पल भर में स्वाहा हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक जो बिटकॉइन अपने ऑल-टाइम हाई (All-Time High) पर था, वह अब वहां से करीब 45% तक क्रैश हो चुका है। बाजार में छाई इस अनिश्चितता ने नए और पुराने दोनों तरह के निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। आइए आपको बताते हैं बिटकॉइन क्रैश होने की बड़ी वजहें...
क्यों भाग रहे हैं निवेशक?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण ग्लोबल रेगुलेटरी दबाव है। दुनिया के कई बड़े देश क्रिप्टोकरेंसी पर लगाम कसने के लिए नए और कड़े नियम बना रहे हैं, जिससे निवेशकों में डर का माहौल है। दूसरा कारण अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी है। जब भी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत देता है, निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों (जैसे क्रिप्टो और शेयर बाजार) से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर भागने लगते हैं। इसके अलावा, बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking) ने भी आग में घी डालने का काम किया है।
'डिस्ट्रैस सेल' और गायब होते खरीदार
बाजार में एक डरावनी स्थिति पैदा हो गई है जिसे 'डिस्ट्रैस सेल' कहा जा रहा है। इसका मतलब है कि लोग नुकसान के डर से घबराकर अपने सिक्के बेच रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो निवेशक पहले गिरावट पर खरीदारी (Dip Buying) करते थे, वे अब बाजार से गायब नजर आ रहे हैं। कम कीमत पर भी खरीदारों का न होना इस बात का संकेत है कि लोगों का भरोसा फिलहाल डिजिटल गोल्ड से डगमगा रहा है। सिर्फ बिटकॉइन ही नहीं, बल्कि इथेरियम, सोलाना और डॉजकॉइन जैसे अन्य प्रमुख ऑल्टकॉइन्स में भी भारी गिरावट देखी गई है।
क्या यह निवेश का सही मौका है?
बाजार के जानकारों की राय यहाँ बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि यह एक 'हेल्दी करेक्शन' है और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह सस्ते में बिटकॉइन खरीदने का सुनहरा मौका हो सकता है। उनका तर्क है कि बिटकॉइन ने अतीत में कई बार 50% से ज्यादा की गिरावट के बाद शानदार वापसी की है। वहीं, दूसरी ओर सतर्क विश्लेषकों का कहना है कि जब तक बाजार में स्थिरता नहीं आती और खरीदार वापस नहीं लौटते, तब तक पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। उनका मानना है कि बिटकॉइन अभी और नीचे गिरकर 60,000 डॉलर के स्तर को टेस्ट कर सकता है।
अब आगे क्या होगा?
आने वाले कुछ हफ्ते क्रिप्टो मार्केट के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। निवेशकों की नजरें अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और प्रमुख देशों के रुख पर टिकी हैं। यदि बिटकॉइन 64,000 डॉलर के सपोर्ट लेवल को बनाए रखने में कामयाब होता है, तो हमें रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर यह स्तर टूटता है, तो भारी गिरावट का अगला दौर शुरू हो सकता है।
