केंद्र सरकार ने टैक्सी ड्राइवरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'भारत टैक्सी' प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से लॉन्च कर दिया है। दिल्ली-NCR और गुजरात में सफल ट्रायल के बाद अब इसे पूरे देश में विस्तार देने की तैयारी है। इस पहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह किसी एक अमीर मालिक की जेब भरने के लिए नहीं, बल्कि उन लाखों ड्राइवरों के लिए बनाया गया है जो दिन-रात सड़कों पर मेहनत करते हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि 'भारत टैक्सी' का मकसद मुनाफे को निचले स्तर तक पहुंचना है, ताकि पसीने की कमाई का असली हकदार ड्राइवर ही रहे।
₹500 का निवेश और मालिकाना हक
इस मॉडल में शामिल होने की प्रक्रिया बहुत आसान और सस्ती रखी गई है। किसी भी ड्राइवर को इस प्लेटफॉर्म का हिस्सा बनने के लिए सिर्फ ₹500 का निवेश करना होगा। यह राशि उसे कंपनी के शेयरहोल्डर या बिजनेस पार्टनर के तौर पर स्थापित करेगी। अमित शाह ने समझाया कि अगले तीन वर्षों में यह निवेश एक बड़े मुनाफे में बदल सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि भारत टैक्सी भविष्य में 25 करोड़ रुपये कमाती है, तो उसका एक बड़ा हिस्सा ड्राइवरों के बीच उनके द्वारा तय किए गए किलोमीटर के आधार पर बांट दिया जाएगा। इससे ड्राइवरों को न केवल उनकी ट्रिप का पैसा मिलेगा, बल्कि साल के अंत में कंपनी के मुनाफे में भी बोनस जैसा हिस्सा मिलेगा।
जीरो कमीशन और सर्ज-प्राइसिंग से आजादी
मौजूदा समय में ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म ड्राइवरों की कमाई का करीब 30% हिस्सा कमीशन के तौर पर काट लेते हैं। इसके अलावा, यात्रियों को भी 'सर्ज प्राइसिंग' (पीक आवर्स में बढ़ा हुआ किराया) की मार झेलनी पड़ती है। लेकिन 'भारत टैक्सी' ने इसे पूरी तरह बदल दिया है। यह प्लेटफॉर्म 'जीरो-कमीशन' मॉडल पर काम करता है, जिसका मतलब है कि ड्राइवर जो कमाएगा, वह लगभग पूरा उसकी जेब में जाएगा। साथ ही, इसमें यात्रियों के लिए भी सर्ज-फ्री प्राइसिंग रखी गई है, जिससे यह ग्राहकों और ड्राइवरों दोनों के लिए फायदेमंद है।
'मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट' के तहत रजिस्टर्ड यह प्लेटफॉर्म विदेशी निवेश वाली कंपनियों के लिए एक मजबूत देसी चुनौती है। अमित शाह ने ड्राइवरों से कहा कि अभी उन्हें तय किराया मिलेगा, लेकिन तीन साल के धैर्य के बाद वे कंपनी के शुद्ध लाभ में अपनी हिस्सेदारी देखेंगे। यह मॉडल 'सहकारिता से समृद्धि' के विजन पर आधारित है, जहाँ तकनीक का इस्तेमाल पूंजीपतियों को अमीर बनाने के बजाय श्रम करने वाले वर्ग को सशक्त बनाने के लिए किया जा रहा है।
