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Private Jet से अमीर बचा रहे करोड़ों का टैक्स! सोशल मीडिया का यह दावा कितना सच?

सोशल मीडिया पर पूरे भरोसे का साथ ऐसा झूठ परोसा जाता है, जिसे अक्सर सच समझ लिया जाता है। ऐसा ही एक दावा अमीरों के प्राइवेट जेट्स को लेकर किया जा रहा है। जानें इस दावे में कितना दम?

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प्राइवेट जेट से सुविधाएं मिलती हैं, टैक्स में छूट नहीं

Private Jet Customs Rules : सोशल मीडिया फैक्ट और फिक्शन का ऐसा ग्रे जोन है, जहां तत्थ्यों को तोड़-मरोड़कर ऐसे पेश किया जाता है कि अक्सर लोग सच मान लेते हैं। फिलहाल अमीर लोगों के प्राइवेट जेल को लेकर भी ऐसा दावा किया जा रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। इंस्टा, फेसबुक और यूट्यूब जैसे तमाम प्लेटफॉर्म पर बिजनेस, और टैक्स सेविंग पर शॉर्ट्स और रील्स में ज्ञान देने वाले चैनलों की मानें, तो देश के अमीर लोग अपने प्राइवेट जेट से बिना कस्टम चुकाए विदेश से करोड़ों रुपये के लग्जरी आइटम खरीदकर ला रहे हैं।

सोशल मीडिया पर क्या दावा किया जा रहा?

सोशल मीडिया पर रील तेजी में दावा किया गया है कि अमीर लोग प्राइवेट जेट से करोड़ों रुपये की लग्जरी घड़ियां, सोना, महंगी कलाकृतियां और दूसरे कीमती सामान लाते हैं और इस तरह कस्टम्स ड्यूटी से बच जाते हैं। रील में यह भी कहा गया है कि प्राइवेट टर्मिनल पर "जीरो चेकिंग" होती है और प्राइवेट जेट एक तरह का "उड़ता हुआ टैक्स-फ्री वेयरहाउस" है। इस रील में 5 दावे किए गए हैं। इनमें ज्यादातर झूठे और सच को तोड़-मरोड़कर पेश किए गए हैं। भारतीय कानून और कस्टम्स नियमों के हिसाब से देखें, तो ये दावे पूरी भ्रामक हैं।

प्राइवेट जेट से टैक्स सेविंग का दावा झूठा

प्राइवेट जेट से टैक्स सेविंग का दावा झूठा

क्या प्राइवेट की कस्टम्स जांच नहीं होती?

भारत में चाहे कोई व्यक्ति कमर्शियल फ्लाइट से आए या प्राइवेट जेट से, दोनों पर कस्टम्स एक्ट और दूसरे संबंधित नियम लागू होते हैं। अंतर केवल इतना हो सकता है कि प्राइवेट विमान के यात्रियों के लिए अलग टर्मिनल या अलग प्रक्रिया हो, लेकिन कस्टम्स और इमिग्रेशन की जांच से छूट नहीं मिलती। अगर कोई यात्री ड्यूटी योग्य सामान लेकर आता है, तो उसे घोषित करना और लागू कस्टम्स ड्यूटी चुकाना जरूरी होता है।

क्या प्राइवेट जेट से ड्यूटी बचाई जा सकती है?

सीधा जवाब है, नहीं। भारत में विदेश से लाए गए लग्जरी सामान पर तय नियमों के अनुसार कस्टम्स ड्यूटी लगती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि सामान क्या है, उसकी कीमत कितनी है और वह किस उद्देश्य से लाया जा रहा है। सिर्फ प्राइवेट जेट में यात्रा करने से किसी को ड्यूटी से छूट नहीं मिलती।

'जीरो चेकिंग' वाला दावा कितना सही है?

यह दावा भी सही नहीं है। प्राइवेट एविएशन टर्मिनल पर प्रक्रिया अधिक तेज और सुविधाजनक हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई जांच ही नहीं होती। कस्टम्स अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर सामान की जांच, दस्तावेज देखने और ड्यूटी वसूलने का पूरा अधिकार होता है।

क्या प्राइवेट जेट से लग्जरी सामान ला सकते हैं?

हां, ऐसा हो सकता है। दुनिया भर में बेहद महंगी कलाकृतियां, ज्वेलरी और लग्जरी सामान कई बार प्राइवेट विमान से भेजे जाते हैं क्योंकि इससे सुरक्षा और गोपनीयता बेहतर रहती है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं कि उन पर कस्टम्स नियम लागू नहीं होंगे। ऐसे सामान के लिए भी घोषणा, दस्तावेज और लागू टैक्स नियमों का पालन करना पड़ता है।

'टैक्स-फ्री वेयरहाउस' वाली बात कहां से आई?

रील में जिस अवधारणा का जिक्र किया गया है, वह शायद दुनिया के कुछ देशों में मौजूद फ्रीपोर्ट या बॉन्डेड वेयरहाउस से जुड़ी है। इन जगहों पर कुछ परिस्थितियों में सामान को अस्थायी रूप से रखा जा सकता है और टैक्स का भुगतान बाद में या कुछ शर्तों के साथ होता है। लेकिन, यह सुविधा कानून के तहत नियंत्रित होती है और इसका प्राइवेट जेट से सीधा संबंध नहीं होता। भारत में भी बॉन्डेड वेयरहाउस की व्यवस्था है, लेकिन उसके अपने नियम हैं और यह सामान्य यात्रियों के लिए टैक्स बचाने का तरीका नहीं है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानिया author

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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