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अपने पैसे को लॉक करने जा रहे हैं तो रुके! निवेश से पहले इन 5 बातों को जरूर चेक करें

अगर आप भी Small Saving Scheme में निवेश करने जा रहे हैं तो रुकिए! अपने पैसे को कहीं लॉक करने से पहले आपको कुछ फंडामेंटल जरूर चेक कर लेने चाहिए। ताकि आपको पैसों के लिए परेशान न होना पड़े।

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Small Saving Schemes

भारत में मध्यम वर्ग के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) जैसी छोटी बचत योजनाएं हमेशा से भरोसेमंद रही हैं। सरकारी सुरक्षा और तय रिटर्न के कारण लोग आँख बंद करके इनमें पैसा लगा देते हैं। लेकिन, किसी भी योजना में अपनी मेहनत की कमाई को लंबे समय के लिए 'लॉक' करने से पहले कुछ बुनियादी बातों को समझना बेहद जरूरी है। अक्सर निवेशक केवल ऊंचे ब्याज दर को देखकर निवेश कर देते हैं, लेकिन बाद में उन्हें लिक्विडिटी (पैसे की उपलब्धता) या टैक्स से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, निवेश का बटन दबाने से पहले आपको अपनी वित्तीय जरूरतों और स्कीम के नियमों का मिलान जरूर कर लेना चाहिए, ताकि भविष्य में आपको पैसों के लिए परेशान न होना पड़े।

इन 5 बातों को न करें नजरअंदाज

सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात है 'लॉक-इन पीरियड'। छोटी बचत योजनाओं में आपका पैसा एक निश्चित समय के लिए फंस जाता है। उदाहरण के तौर पर, PPF में 15 साल और सुकन्या समृद्धि में बेटी के 21 साल का होने तक पैसा लॉक रहता है। अगर आपको बीच में अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो इन स्कीम से पैसा निकालना काफी मुश्किल या घाटे का सौदा हो सकता है। दूसरी बड़ी बात है 'ब्याज दरों में बदलाव'। सरकार हर तीन महीने (तिमाही) में इन योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करती है। इसका मतलब है कि आज जो ब्याज मिल रहा है, जरूरी नहीं कि वह पूरे निवेश काल के दौरान उतना ही रहे। इसलिए, केवल मौजूदा रिटर्न के आधार पर लंबी अवधि का फैसला न लें।

तीसरा पहलू है 'टैक्स का गणित'। कुछ योजनाएं निवेश के समय टैक्स छूट (80C) देती हैं, तो कुछ के मैच्योरिटी पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है। निवेश से पहले यह जरूर देखें कि वह स्कीम 'E-E-E' (Investment, Interest, Maturity तीनों पर टैक्स फ्री) कैटेगरी में आती है या नहीं। चौथी बात है 'निवेश की सीमा'। हर सरकारी स्कीम में पैसा जमा करने की एक अधिकतम लिमिट होती है, जैसे PPF में आप साल भर में 1.5 लाख रुपये से ज्यादा जमा नहीं कर सकते। अंत में, अपनी 'महंगाई दर (Inflation)' के साथ रिटर्न की तुलना जरूर करें। अगर कोई स्कीम 7% ब्याज दे रही है और महंगाई दर भी 6% के आसपास है, तो आपका वास्तविक मुनाफा बहुत कम होगा। इन पांचों बातों को ध्यान में रखकर किया गया निवेश ही आपको भविष्य में आर्थिक मजबूती देगा।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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