अगर आप कोई प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं, तो ये खबर आपके काफी काम आ सकती है। अगर आप कोई प्रॉपर्टी खरीदने का सोच रहे हैं, तो सिर्फ लोकेशन और डिजाइन देखकर खुश न हो जाएं। असली खेल तो उसके पेपर्स में छुपा होता है। सही दस्तावेजों की जांच करके आप एक मिनट में ही पकड़ सकते हैं कि डीलर कहीं झोल तो नहीं कर रहा। इस तरह आप धोखाधड़ी और नुकसान से बच सकते हैं।
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले आपको उसके मालिकाना हक और पेपर्स की अच्छे से जांच करना बेहद जरूरी है। फ्लैट, मकान, जमीन या किसी अन्य संपत्ति को खरीदने से पहले पूरी जानकारी जुटाना जरूरी है, वरना ठगी का खतरा रहता है। नई प्रॉपर्टी खरीदते समय लोकेशन, दस्तावेज, डीलर की विश्वसनीयता और संपत्ति पर किसी भी तरह के विवाद की जांच करना बहुत जरूरी है। कानूनी सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है। आइए आपको डिटेल में बताते हैं कि कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले आपको कौन से पेपर्स जरूर चेक करने चाहिए?
इन डाक्यूमेंट्स को जरूर करें चेक
1. ओनरशिप वेरिफिकेशन: सबसे पहले यह जांचें कि प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन है और उसके पास सही दस्तावेज हैं।
2. चेनल डॉक्यूमेंट: यह बताता है कि संपत्ति किस-किस के पास से गुज़री है। हर ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड होना चाहिए ताकि मालिकाना हक स्पष्ट रहे।
3. एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट: इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, मोर्टगेज, टैक्स बकाया या पेनल्टी तो नहीं है। रजिस्ट्रार ऑफिस में फॉर्म नंबर 22 भरकर भी जानकारी ली जा सकती है।
4. ऑक्यूपैंसी सर्टिफिकेट (OC): यह बिल्डर से जरूरी दस्तावेज है। अगर बिल्डर नहीं देता, तो खरीदार कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।
5. पोजेशन लेटर: यह प्रॉपर्टी पर कब्जे की तारीख बताता है। होम लोन के लिए इसकी असली कॉपी जरूरी है। ध्यान दें कि ओसी मिलने तक यह अकेले प्रॉपर्टी पर कब्जे का सबूत नहीं माना जाता।
6. मॉर्टगेज/गिरवी: अगर प्रॉपर्टी किसी लोन के लिए गिरवी रखी है, तो यह जानना जरूरी है। प्रॉपर्टी को लोन के लिए कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
7. टैक्स पेमेंट स्टेटस: विक्रेता ने प्रॉपर्टी टैक्स चुकाया है या नहीं, यह स्थानीय म्युनिसिपल अथॉरिटी में जाकर देखें। टैक्स डिफॉल्ट से प्रॉपर्टी की वैल्यू पर असर पड़ सकता है।
8. यूटिलिटी बिल: पानी, बिजली, गैस आदि बिल चेक करें।
9. कार अलॉटमेंट लेटर: अगर प्रॉपर्टी के साथ पार्किंग की सुविधा है, तो इसका लेटर भी देखें।
10. रेसीडेंट वेलफेयर NOC: प्रॉपर्टी डीलर को रेजिडेंट वेलफेयर कमेटी से NOC मिला है या नहीं।
11. RERA रजिस्ट्रेशन: यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड और वैध है। खरीदार को यह जरूर चेक करना चाहिए।
प्रॉपर्टी खरीदते समय हर दस्तावेज और जानकारी की पूरी जांच करना बहुत जरूरी है। इससे धोखाधड़ी का खतरा कम होता है और निवेश सुरक्षित रहता है।
