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एल्युमीनियम की भारी कमी से जूझ रही है बियर इंडस्ट्री, सरकार से मांगी आयात में छूट

प्रमुख एल्युमीनियम कैन आपूर्तिकर्ता बॉल बेवरेज पैकेजिंग इंडिया और कैन-पैक इंडिया, भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयों में अधिकतम घरेलू क्षमता तक पहले ही पहुंच चुकी हैं। इन कंपनियों का कहना है कि वे कम से कम 6-12 महीनों तक आपूर्ति नहीं बढ़ा पाएंगी, जब तक कि नई उत्पादन लाइन नहीं जुड़ जाती।

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एल्युमीनियम कैन की भारी कमी से जूझ रही है बियर इंडस्ट्री। (फोटो क्रेडिट-iStock)

एल्युमीनियम कैन की भारी कमी से जूझ रहे घरेलू बीयर उद्योग ने सरकार से विदेशों से निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण मानदंडों (क्यूसीओ) में ‘अल्पकालिक नियामकीय छूट’ देने का आग्रह किया है। ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) के अनुसार, बीयर उद्योग को 500 मिलीलीटर के कैन की 12-13 करोड़ इकाइयों की वार्षिक कमी का सामना करना पड़ रहा है, जो देश में कुल बीयर बिक्री का लगभग 20 प्रतिशत बैठता है। इससे सरकारी राजस्व में लगभग 1,300 करोड़ रुपये की कमी आने का अंदेशा है।

सरकार द्वारा गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) के माध्यम से एल्युमीनियम कैन को एक अप्रैल, 2025 से अनिवार्य बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) प्रमाणन के दायरे में लाया गया था। इसके चलते देश में बीयर के साथ-साथ अन्य पेय पैकेजिंग उद्योग के लिए अल्पकालिक आपूर्ति की समस्याएं पैदा हुई हैं।

प्रमुख एल्युमीनियम कैन आपूर्तिकर्ता बॉल बेवरेज पैकेजिंग इंडिया और कैन-पैक इंडिया, भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयों में अधिकतम घरेलू क्षमता तक पहले ही पहुंच चुकी हैं। इन कंपनियों का कहना है कि वे कम से कम 6-12 महीनों तक आपूर्ति नहीं बढ़ा पाएंगी, जब तक कि नई उत्पादन लाइन नहीं जुड़ जाती।

आपूर्ति बाधित होने का हो सकता है खतरा

इसके अलावा, क्यूसीओ के कारण बीयर उद्योग विदेशी विक्रेताओं से कैन आयात नहीं कर सकता क्योंकि बीआईएस प्रमाणन में कई महीने लग सकते हैं, जिससे आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो सकता है। बीएआई, जो तीन प्रमुख बीयर विनिर्माताओं - एबी इनबेव, कार्ल्सबर्ग और यूनाइटेड ब्रूअरीज - का प्रतिनिधित्व करती है, ने सरकार से एक साल के लिए क्यूसीओ मानदंडों में ढील देने की मांग की है। इनकी भारत में बिकने वाली बीयर में कुल हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है।

हाल ही में यूनाइटेड ब्रूअरीज लिमिटेड (यूबीएल) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ने भी पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में इस मुद्दे को उठाया है। उद्योग के लिए, चुनौती ‘मुद्रास्फीति से ज्यादा आपूर्ति की है, खासकर पैकेजिंग सामग्री की, क्योंकि भारत में कैन की कमी है।

बीएआई ने पत्र लिखकर किया अनुरोध

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग को लिखे एक पत्र में, बीएआई ने अनुरोध किया है कि ‘आयातित एल्युमीनियम के कैन’ के लिए बीआईएस प्रमाणन को अनिवार्य करने वाले क्यूसीओ के कार्यान्वयन को एक अप्रैल, 2026 तक स्थगित किया जाए ताकि घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को स्थानीय विनिर्माण क्षमता विकसित करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

इस विस्तार से घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को स्थानीय विनिर्माण क्षमता विकसित करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। सरकार ने बिना बीआईएस प्रमाणन वाले एल्युमीनियम के कैन के आयात के लिए आपूर्तिकर्ताओं को 30 सितंबर, 2025 तक का विस्तार दिया है। हालांकि, बीएआई के अनुसार, यह देश में कैन का आयात करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

बीएआई ने यह भी अनुरोध किया है कि ‘‘जिन अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना बीआईएस प्रमाणन आवेदन जमा किया है, उन्हें उनके आवेदनों का प्रसंस्करण होने तक बिना बीआईएस प्रमाणन वाले कैन के आयात की अनुमति दी जाए।’’ बीएआई के महानिदेशक विनोद गिरि ने पत्र में कहा कि यह व्यवस्था नियामकीय निगरानी को बनाए रखते हुए व्यावसायिक व्यवधान से बचाएगी।

(इनपुट- भाषा)

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Gaurav Tiwari
गौरव तिवारी author

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से ... और देखें

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