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भारतीय बैंकों के बारे में RBI ने जो कहा, जानकर दिल खुश हो जाएगा

Indian Banks: भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आकलन के अनुसार, भारत का बैंकिंग सेक्टर 2025 का अंत पिछले एक दशक की सबसे साफ बैलेंस शीट के साथ कर रहा है। मजबूत पूंजी आधार, कम फंसे कर्ज और बेहतर मुनाफे के कारण बैंक संभावित आर्थिक झटकों का सामना करते हुए कर्ज वृद्धि को समर्थन देने की स्थिति में हैं।

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बुरे कर्ज से बाहर निकला बैंकिंग सिस्टम, आगे भी स्थिरता का भरोसा (तस्वीर-Canva)

Indian Banks: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुताबिक देश का बैंकिंग सेक्टर 2025 के अंत तक पिछले एक दशक में सबसे साफ और मजबूत बैलेंस शीट के साथ खड़ा है। मजबूत पूंजी आधार, कम फंसे कर्ज (एनपीए) और बेहतर मुनाफे के चलते बैंक किसी भी संभावित झटके का सामना करने में सक्षम हैं और साथ ही कर्ज वृद्धि को भी समर्थन दे पाएंगे। दिसंबर में जारी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक ने यह आकलन किया।

लंबे तनाव चक्र से निर्णायक बाहर निकलना

RBI ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 के दौरान बैंकिंग स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख संकेतकों में लगातार सुधार हुआ है। यह सुधार उस लंबे तनाव चक्र से निर्णायक दूरी को दर्शाता है, जो पिछले दशक के कर्ज बूम के बाद बना था। केंद्रीय बैंक के आगे देखने वाले स्ट्रेस टेस्ट बताते हैं कि बेहद प्रतिकूल आर्थिक हालात में भी बैंक नियामकीय न्यूनतम स्तर से ऊपर पूंजी बनाए रखेंगे। इससे बैंकिंग सिस्टम की झटके सहने की क्षमता मजबूत हुई है।

एनपीए में लगातार गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार जारी रहा। मार्च 2025 तक अनुसूचित कॉमर्शियल बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात 2.3% पर आ गया, जो कई वर्षों का निचला स्तर है। इसके बाद सितंबर 2025 तक यह और घटकर 2.2% हो गया। इसी अवधि में नेट एनपीए करीब 0.5% पर स्थिर रहा। आरबीआई का अनुमान है कि आधारभूत परिदृश्य में मार्च 2027 तक बैंकों का खराब कर्ज अनुपात और घटकर करीब 1.9% तक आ सकता है। इसका मतलब है कि नए तनाव सीमित रहेंगे और वसूली की रफ्तार फिसलन (slippages) से तेज रहेगी।

बेहतर अंडरराइटिंग और आर्थिक वृद्धि का असर

केंद्रीय बैंक ने एनपीए में गिरावट का श्रेय पुराने खराब कर्जों के समाधान, कड़े कर्ज मानकों और स्थिर आर्थिक वृद्धि को दिया। ब्याज दरें ऊंची होने के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधियों ने उधारकर्ताओं को अपने कर्ज चुकाने में मदद की। इस साफ-सफाई से बैलेंस शीट की कमजोरियां काफी हद तक दूर हुई हैं, जो पहले कर्ज वृद्धि में बाधा बनती थीं।

मजबूत पूंजी और कम इक्विटी निर्भरता

पूंजी पर्याप्तता के मोर्चे पर भी बैंकिंग सिस्टम मजबूत रहा। कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेशियो (CRAR) बेसल-III मानकों से काफी ऊपर बना रहा। वहीं, कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET-1) अनुपात भी नियामकीय सीमा से अधिक रहा। मजबूत आंतरिक आय और कम क्रेडिट लागत के कारण बैंकों की नई इक्विटी जुटाने पर निर्भरता घटी है, जबकि कर्ज देने की गतिविधियां तेज हो रही हैं।

मुनाफा बना स्थिरता का आधार

आरबीआई के अनुसार, बैंकिंग सेक्टर की मजबूती में मुनाफे की अहम भूमिका रही। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, स्थिर मार्जिन और कम प्रावधानों के चलते बैंकों ने परिसंपत्तियों और इक्विटी पर अच्छे रिटर्न दर्ज किए। निरंतर मुनाफा भविष्य के किसी भी तनाव को झेलने की क्षमता बढ़ाता है और आर्थिक विस्तार के लिए फंडिंग जारी रखने में मदद करता है।

जमा और तरलता की स्थिति

देयता पक्ष पर, जमा वृद्धि कर्ज विस्तार के साथ लगभग बराबरी पर रही, जिससे फंडिंग असंतुलन की चिंताएं कुछ हद तक कम हुईं। हालांकि, आरबीआई ने आगाह किया कि जमाओं के लिए प्रतिस्पर्धा अब भी कड़ी बनी हुई है। तरलता की स्थिति को प्रबंधनीय बताया गया है और बैंक बदलते मौद्रिक हालात के अनुरूप अपनी फंडिंग रणनीतियां समायोजित कर रहे हैं।

स्थिरता बरकरार

आगे देखते हुए, आरबीआई का आधारभूत अनुमान बताता है कि परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर बनी रहेगी। मजबूत आर्थिक गति और उधारकर्ताओं की बेहतर बैलेंस शीट इसका सहारा बनेंगी। यहां तक कि गंभीर नकारात्मक परिदृश्यों जैसे तेज आर्थिक मंदी या वित्तीय बाजारों में तनाव में भी एनपीए में केवल सीमित बढ़ोतरी होगी और पूंजी स्तर नियामकीय सीमा से ऊपर बने रहेंगे। कुल मिलाकर, भारतीय बैंकिंग सिस्टम 2025 के अंत में पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और आत्मविश्वास से भरा दिखाई देता है।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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