Gautam Adani Struggle : स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले आयोजित 'अपनी बात, अपनों के साथ' के दूसरे संस्करण में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपनी जीवन यात्रा और कंपनी द्वारा हाल ही में पार की गई कानूनी चुनौतियों पर बात की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ग्रुप के विभिन्न प्रोजेक्ट साइटों पर काम करने वाले कर्मचारियों के संघर्ष की तुलना अपने शुरुआती दिनों से की और बताया कि किस तरह देश के युवाओं की मेहनत भारत के भविष्य को नया आकार दे रही है।
किशोरावस्था के संघर्ष और प्रोजेक्ट साइट के युवाओं से जुड़ाव
गौतम अडानी (Gautam Adani Journey) ने 16 साल की उम्र में अपने घर से मुंबई के लिए निकले पहले कदम को याद करते हुए कहा कि 16 साल की उम्र, मुंबई की तरफ पहला कदम। न मां के हाथ का खाना, न पिता के संरक्षण का अहसास और न ही कोई तय रास्ता। पास में सिर्फ कड़ी मेहनत का साहस और हर दिन कुछ नया सीखने की इच्छा थी। उन्होंने आगे कहा कि जब देश के कोने-कोने से युवा अपने घरों और परिवारों को छोड़कर आंखों में सपने लिए अडानी ग्रुप की प्रोजेक्ट साइटों पर पहुंचते हैं, तो उन्हें उनमें अपनी ही यात्रा की झलक दिखाई देती है। अपने पसीने से अपना और देश का भविष्य गढ़ने वाले इन लाखों युवाओं में वे अपनी खुद की कहानी देखते हैं।
कानूनी मामलों की बर्खास्तगी और हिंडनबर्ग विवाद पर रुख
अडानी का यह बयान अमरीका के न्यूयॉर्क ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा अमरीकी न्याय विभाग (US DOJ) के आपराधिक मामले को खारिज किए जाने के तुरंत बाद आया है। अपने संबोधन में उन्होंने हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों और अमरीकी न्याय विभाग के मामले के बाद के दौर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों ने ग्रुप के सिद्धांतों और चरित्र की परीक्षा ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिकूल परिस्थितियां व्यक्ति या कंपनी के चरित्र को उजागर करती हैं, उसे परिभाषित नहीं करतीं।
कानूनी अधिकार से बड़ा होता है भरोसा
चुनौतियों के समय लिए गए बड़े फैसलों का जिक्र करते हुए गौतम अडानी ने बताया कि कानूनन सही होने के बावजूद ग्रुप ने अपने 20,000 करोड़ रुपये के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) को वापस लेने का फैसला किया था। इस पर उन्होंने कहा कि भरोसा किसी भी कानूनी अधिकार से बड़ा होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मूल्य और संस्कार ही यह तय करते हैं कि अधिकारों का इस्तेमाल कब और कैसे किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने समूह के कर्मचारियों, सहयोगियों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया, साथ ही आलोचकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आलोचना से हमेशा आत्ममंथन करने का अवसर मिलता है।
80वें स्वतंत्रता दिवस का महत्व और 2047 का दृष्टिकोण
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बात करते हुए अडानी ने कहा कि यह दिन देश की उपलब्धियों का जश्न मनाने के साथ-साथ हर पीढ़ी को उसकी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है। आजादी की शताब्दी (2047) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास न केवल भारत द्वारा बनाए गए बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को याद रखेगा, बल्कि उन अवसरों, मजबूत समुदायों और जगाई गई उम्मीदों को भी याद रखेगा जो इस दौरान पैदा किए गए।
'विकसित भारत' के निर्माण का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में गौतम अडानी ने पूरे 'अडानी परिवार' और उसके सहयोगियों से पिछले दो वर्षों के पाठ को विनम्रता, सत्यनिष्ठा और नए उद्देश्य के साथ आगे ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय का लक्ष्य केवल विश्वस्तरीय व्यवसाय खड़ा करना नहीं है, बल्कि ऐसे संस्थान बनाना है जो व्यक्तियों से परे टिके रहें, अवसरों का विस्तार करें और 'विकसित भारत' के साझा सपने को साकार करने में मदद करें।
