IBC बिल 2025: बड़े बदलाव का प्रस्ताव, बैंकों के लिए खुलेंगे राहत के ये रास्ते!
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Dec 29, 2025, 10:41 PM IST
IBC Amendment Bill 2025: दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) विधेयक, 2025 में प्रस्तावित संशोधन बैंकों और अन्य कर्जदाताओं के लिए राहत लेकर आ सकते हैं। इन बदलावों का उद्देश्य दिवालिया मामलों के निपटारे में लगने वाले लंबे समय को कम करना है। इससे कर्ज वसूली की प्रक्रिया तेज होगी और बैंकों को ज्यादा रकम वापस मिलने की उम्मीद है
आईबीसी 2025: लंबित मामलों का बोझ घटेगा, कर्ज वसूली होगी तेज (तस्वीर-Canva)
IBC Amendment Bill 2025: दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) विधेयक 2025 में सरकार ने कई अहम बदलाव प्रस्तावित किए हैं। इन बदलावों का मकसद बैंकों और अन्य कर्ज देने वालों को राहत देना और कर्ज वसूली की प्रक्रिया को तेज करना है। अभी आईबीसी के तहत मामलों के निपटारे में काफी समय लग रहा है, जिससे बैंकों को नुकसान उठाना पड़ता है। आईसीआरए की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, नए संशोधनों से यह स्थिति सुधर सकती है।
कौन-से नए प्रावधान जोड़े गए
आईएएनएस के मुताबिक आईसीआरए की रिपोर्ट में बताया गया है कि आईबीसी 2025 में समूह दिवालिया प्रक्रिया (ग्रुप इनसॉल्वेंसी), सीमा पार यानी विदेश से जुड़े दिवालिया मामलों (क्रॉस बॉर्डर इनसॉल्वेंसी) और कर्जदाताओं द्वारा सीधे दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनसे मामलों को एक साथ और जल्दी सुलझाने में मदद मिलेगी। इससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।
एनसीएलटी और एनसीएलएटी पर बोझ होगा कम
रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में कर्मचारियों और बेंच की संख्या बढ़ाने की योजना है। साथ ही कुछ कानूनी सुधार भी किए जा रहे हैं। इससे अदालतों पर बढ़ते मामलों का दबाव कम होगा और फैसले जल्दी आ सकेंगे।
कर्ज वसूली का समय घटेगा
आईसीआरए का मानना है कि संसद में पेश किया गया आईबीसी संशोधन विधेयक और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) व भारतीय दिवालियापन और दिवाला बोर्ड (आईबीबीआई) के सुझाव मिलकर कर्ज वसूली की प्रक्रिया को तेज करेंगे। इससे बैंकों को ज्यादा रकम वापस मिलने की उम्मीद है। अभी कई मामलों में बैंकों को केवल करीब 32 प्रतिशत राशि ही मिल पा रही है।
रियल एस्टेट सेक्टर को नहीं मिली राहत
हालांकि, यह भी साफ किया गया है कि ये सुधार फिलहाल रियल एस्टेट सेक्टर पर लागू नहीं होंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र में अभी भी बड़ी संख्या में दिवालिया मामले लंबित हैं। इसके बावजूद इस सेक्टर के लिए अलग से कोई बड़ा सुधार प्रस्तावित नहीं किया गया है।
घर खरीदारों के लिए अलग सुधार की जरुरत
आईसीआरए का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में घर खरीदारों की सुरक्षा और अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अलग तरह के सुधार जरूरी हैं। मौजूदा व्यवस्था इन समस्याओं को पूरी तरह हल नहीं कर पा रही है, इसलिए इस सेक्टर के लिए विशेष नियम बनाए जाने चाहिए।
आईबीसी के 9 साल का सफर
आईबीसी कानून को अक्टूबर 2025 में 9 साल पूरे हो गए। इस दौरान इस कानून के जरिए करीब 4 लाख करोड़ रुपये की वसूली की गई है। यह राशि अन्य वसूली के तरीकों की तुलना में काफी बेहतर मानी जाती है। सितंबर 2025 तक कुल 8,658 कंपनियों के मामले आईबीसी में आए, जिनमें से करीब 63 प्रतिशत मामलों का निपटारा हो चुका है।
मामलों में देरी बनी बड़ी समस्या
रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2025 तक कर्ज वसूली में सुधार दिखा था, लेकिन 2026 की पहली छमाही में फिर गिरावट आई। आईसीआरए की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मनुश्री सागर के अनुसार, सितंबर 2025 तक चल रहे लगभग 75 प्रतिशत मामलों में 270 दिनों से ज्यादा समय लग चुका है, जबकि तय सीमा इससे काफी कम है।
30 हजार से ज्यादा मामले लंबित
एनसीएलटी में इस समय 30,000 से ज्यादा मामले लंबित हैं। मौजूदा क्षमता के हिसाब से इन मामलों को निपटाने में 10 साल से भी ज्यादा समय लग सकता है। फिलहाल आईबीसी के तहत मामलों को सुलझाने में औसतन 700 दिन लग रहे हैं, जबकि कानून में तय समय सीमा केवल 330 दिन है।
सरकार से उम्मीद
हालांकि सरकार एनसीएलटी और एनसीएलएटी की बेंच बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो आईबीसी के मामलों के निपटारे में तेजी आ सकती है और बैंकों व निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है।
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