Public Sector Banks Merger News: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (23 फरवरी 2026) को साफ कहा कि सरकार के पास अभी सरकारी बैंकों (पीएसबी) के विलय की कोई तय योजना या रूपरेखा नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बैंकों को आपस में मिलाने का कोई प्रस्ताव सरकार के सामने नहीं है। यह बात उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय निदेशक मंडल को बजट के बाद संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। सीतारमण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मैं किसी भी ऐसी रूपरेखा से परिचित नहीं हूं। अभी ऐसी कोई प्लानिंग मौजूद नहीं है। बैंकों का विलय न तो यहां चर्चा का विषय था और न ही बजट से पहले इस पर कोई बातचीत हुई थी। उनके इस बयान से यह साफ हो गया है कि निकट भविष्य में बैंकों के बड़े विलय की संभावना फिलहाल नहीं है।
बजट में उच्च-स्तरीय बैंकिंग समिति का प्रस्ताव
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस समिति का काम भारत के बैंकिंग सिस्टम को और मजबूत बनाने के उपाय सुझाना होगा। उन्होंने कहा कि जब इस नई समिति का कार्यक्षेत्र तय हो जाएगा, तब वह बैंकिंग से जुड़े हर महत्वपूर्ण पहलू पर विचार करेगी। इसमें बैंकों की कार्यप्रणाली, पूंजी की स्थिति, लोन वितरण, तकनीकी सुधार और जरूरत पड़ने पर संरचनात्मक बदलाव जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि समिति बैंकों के विलय के मुद्दे पर क्या रुख अपनाएगी।
भारतीय रिजर्व बैंक में बजट के बाद संबोधन
वित्त मंत्री ने यह बयान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को संबोधित करने के बाद दिया। यह बैठक बजट पेश होने के बाद आयोजित की गई थी। इस दौरान बैंकिंग क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। सीतारमण ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को देश के विकास लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करना है। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर की अहम भूमिका है, क्योंकि उद्योग, व्यापार, कृषि और आम लोगों को लोन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बैंकों पर ही होती है।
बैंक मजबूत स्थिति में: संजय मल्होत्रा
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी इस मौके पर बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि देश के बैंक पहले की तुलना में बेहतर तरीके से पूंजीकृत हैं। इसका मतलब है कि बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है और वे आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने के लिए तैयार हैं। मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए बैंक अगले चार से पांच साल तक लोन वृद्धि की जरुरतों को आसानी से संभाल सकते हैं। यानी अगर उद्योग और कारोबार में तेजी आती है और कर्ज की मांग बढ़ती है, तो बैंक उसे पूरा करने में सक्षम हैं।
विकसित भारत के लक्ष्य में बैंकिंग की भूमिका
सरकार का मानना है कि अगर भारत को आने वाले वर्षों में विकसित देश बनाना है, तो बैंकिंग क्षेत्र को और मजबूत और सक्षम बनाना जरूरी है। इसी दिशा में उच्च-स्तरीय समिति का गठन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह समिति बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और सुझाव देगी कि किस तरह बैंकों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाए। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि बैंक देश के विकास कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से कैसे समर्थन दे सकते हैं। कुल मिलाकर, सरकार ने फिलहाल बैंकों के विलय से दूरी बना ली है। लेकिन आने वाले समय में बनने वाली समिति की सिफारिशें बैंकिंग क्षेत्र की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
