Bank Nomination Rules : बैंक खाते में नॉमिनी (नामांकित व्यक्ति) बनाना इसलिए बेहद जरूरी माना जाता है ताकि खाताधारक की मौत के बाद जमा राशि को उसके परिवार या कानूनी उत्तराधिकारियों तक बिना किसी कानूनी अड़चन और देरी के पहुंचाया जा सके। नॉमिनी की मौजूदगी से बैंक को पैसे जारी करने में आसानी होती है। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर बैंक खाताधारक से पहले ही नॉमिनी की मौत हो जाए, तो खाते में जमा पैसे का क्या होता है? ऐसी स्थिति में धनराशि का निपटारा कैसे किया जाता है और इसके क्या कानूनी व तकनीकी पहलू हैं?
नॉमिनेशन के नए नियम और नॉमिनी के प्रकार
बैंकिंग कानून (संशोधन) एक्ट 2025 और बैंकिंग कंपनी (नॉमिनेशन) नियम 2025 के अनुसार बैंक ग्राहक अपने जमा खाते के लिए अधिकतम चार व्यक्तियों को नॉमिनी बना सकते हैं। नए नियमों के तहत नॉमिनेशन मुख्य रूप से दो प्रकार का हो सकता है। पहला 'क्रमिक' (Successive Nomination) और दूसरा 'एकसाथ' (Simultaneous Nomination)। क्रमिक नॉमिनेशन में नॉमिनी को एक तय क्रम या प्राथमिकता दी जाती है, जबकि एकसाथ नॉमिनेशन में प्रत्येक नॉमिनी को राशि का एक निश्चित प्रतिशत सौंपा जाता है।
क्रमिक नॉमिनेशन (Successive Nomination) की स्थिति
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 45ZG के अनुसार अगर किसी खाते में क्रमिक नॉमिनेशन किया गया है और प्राथमिकता सूची में पहले स्थान पर मौजूद नॉमिनी की मौत खाताधारक से पहले हो जाती है, तो लिस्ट में दर्ज अगला नॉमिनी अपने आप प्रभावी हो जाता है। इसका मतलब यह है कि पहले नॉमिनी की मौत होने पर खाताधारक को नया नॉमिनेशन कराने की तुरंत जरुरत नहीं पड़ती, बल्कि तय क्रम के अनुसार अगला व्यक्ति नॉमिनी की भूमिका में आ जाता है।
एकसाथ नॉमिनेशन (Simultaneous Nomination) की स्थिति
अगर खाताधारक ने एकसाथ नॉमिनेशन चुना है और कई नामांकित व्यक्तियों में से किसी एक नॉमिनी की मौत खाताधारक से पहले हो जाती है, तो केवल उसी मृत नॉमिनी का हिस्सा अमान्य माना जाता है। बाकी जीवित नॉमिनी को उनका तय प्रतिशत का हिस्सा मिलता रहता है। जिस मृत नॉमिनी का हिस्सा अमान्य हुआ है, उस हिस्से को ऐसे माना जाता है जैसे कि उस भाग के लिए कोई नॉमिनी नियुक्त ही नहीं किया गया था।
बिना प्रभावी नॉमिनी के पैसे पर किसका अधिकार?
एक बात स्पष्ट समझना जरूरी है कि मृत नॉमिनी का हिस्सा उसके अपने कानूनी वारिसों या परिवार के सदस्यों को अपने आप नहीं मिलता है। अगर किसी हिस्से या पूरे खाते के लिए कोई प्रभावी नॉमिनी नहीं बचता है, तो वह राशि खाताधारक के अपने कानूनी दावों और नियमों के तहत निपटाई जाती है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मृतक ग्राहकों के दावों के निपटान संबंधी दिशानिर्देश, 2025 के तहत बैंक निर्धारित प्रक्रियाओं, शर्तों और सीमाओं के अनुसार दावे का सरलीकृत निपटान करते हैं।
कोर्ट ऑर्डर और कानूनी दस्तावेजों की जरुरत
अगर जमा राशि को लेकर खाताधारक के कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है या बैंक को मालिकाना हक पर संदेह होता है, तो बैंक कानूनी प्रतिनिधित्व की मांग कर सकता है। ऐसी स्थिति में मामले के तथ्यों के आधार पर सक्सेशन सर्टिफिकेट (उतराधिकार प्रमाण पत्र), प्रोबेट, लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन या अदालत का कोई आदेश जमा करने के लिए कहा जा सकता है।
नॉमिनी केवल संरक्षक है, अंतिम मालिक नहीं
कानूनी रूप से नॉमिनी का काम केवल बैंक से धनराशि प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। केवल नॉमिनी होने मात्र से वह उस पैसे का वास्तविक मालिक नहीं बन जाता। जमा राशि का अंतिम मालिकाना हक मृतक खाताधारक के वैध कानूनी वारिसों के पास ही होता है। इसलिए, खाताधारकों को समय-समय पर अपने नॉमिनेशन की समीक्षा करते रहना चाहिए और किसी नॉमिनी की मृत्यु होने पर बैंक रिकॉर्ड में तुरंत नए नॉमिनी का नाम अपडेट करा लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के कानूनी विवाद से बचा जा सके।
