Nana Patekar The Real Hero: कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं, जो दुनिया से जाने के बाद भी लोगों की यादों में हमेशा जिंदा रहती हैं। बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर (Nana Patekar) के निधन की खबर ने भी हर किसी को झकझोर दिया है। 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर से फैंस और फिल्म इंडस्ट्री सदमे में है। नाना पाटेकर ने अपने फिल्मी करियर में हर किरदार को पूरी शिद्दत से निभाया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब देश की रक्षा की बात आई, तो उन्होंने फिल्मों से अलग हटकर कारगिल युद्ध के दौरान जवानों के साथ खड़े होने का फैसला किया था? आखिर क्या है नाना पाटेकर से जुड़ा यह किस्सा, आइए जानते हैं इस खास रिपोर्ट में...(Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-Nana Patekar की मौत की खबर सुनकर Tanushree Dutta ने शेयर किया VIDEO, यूज किए चौंकान वाले शब्द)
नाना पाटेकर का जज्बा
नाना पाटेकर ने पर्दे पर सैनिक का किरदार निभाने के साथ-साथ असल जिंदगी में भी सेना को करीब से समझा है। कारगिल युद्ध के दौरान वह करीब 60 दिन तक जवानों के साथ रहे। श्रीनगर, द्रास और लेह जैसे मुश्किल इलाकों में रहकर उन्होंने सैनिकों की जिंदगी को करीब से देखा। इस दौरान कठिन परिस्थितियों का असर ऐसा हुआ कि उनका वजन करीब 76 किलो से घटकर 56 किलो रह गया। दरअसल, नाना का सेना से जुड़ाव काफी पुराना है। साल 1991 में आई फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में उन्होंने आर्मी कमांडो का रोल निभाया था। नाना चाहते थे कि सैनिक का किरदार सिर्फ एक्टिंग तक सीमित न रहे, बल्कि उसे असली ट्रेनिंग और अनुशासन के साथ समझा जाए। इसी वजह से उन्होंने करीब तीन साल तक कमांडो ट्रेनिंग ली और मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ अभ्यास किया। इसी दौरान सेना के प्रति उनका जुड़ाव और मजबूत हुआ। बाद में उन्होंने 1980 के दशक के आखिर में टेरिटोरियल आर्मी भी जॉइन की।

जब कारगिल युद्ध के दौरान मांगी सेना के साथ जाने की इजाजत (pic credit-instagram)
जब कारगिल युद्ध के दौरान मांगी सेना के साथ जाने की इजाजत
साल 1999 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध शुरू हुआ, तब देश बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा था। इसी समय नाना पाटेकर ने सेना के प्रति अपना समर्थन सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने खुद जवानों के साथ रहने और मुश्किल हालात को करीब से देखने की इच्छा जताई।नाना ने पहले अपने वरिष्ठ अधिकारियों से मोर्चे पर जाने की अनुमति मांगी। उन्हें बताया गया कि इसकी मंजूरी रक्षा मंत्री ही दे सकते हैं। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से मुलाकात की। नाना ने उन्हें अपनी शूटिंग ट्रेनिंग और जीते हुए मेडल के बारे में बताया और कारगिल में जवानों के साथ रहने की अनुमति मांगी। मंजूरी मिलने के बाद नाना ने कुछ समय के लिए अपना फिल्मी करियर पीछे रखा और सेना की क्विक रिएक्शन टीम यानी QRT के साथ जुड़ गए। QRT का काम किसी भी आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देना और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहना होता है। (Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-Nana Patekar के निधन से टूटे बेटे Malhar Patekar, गोवा की मॉर्चरी पहुंचे तो छलके आंसू)
60 दिन जवानों के साथ बिताए, 20 किलो वजन घटा
कारगिल के मुश्किल इलाकों में नाना पाटेकर ने करीब 60 दिन सेना के साथ बिताए। इस दौरान वह श्रीनगर, द्रास और लेह जैसे इलाकों में रहे। ऊंचाई वाले इलाकों की कठिन परिस्थितियों में जवान किस तरह ड्यूटी करते हैं, इसे उन्होंने बेहद करीब से देखा। नाना ने बाद में कई मौकों पर कारगिल के अनुभवों को याद किया था। उन्होंने बताया था कि जब वह सेना के साथ गए थे, तब उनका वजन करीब 76 किलो था, लेकिन वापस लौटने तक वह लगभग 56 किलो रह गया था। उन्होंने यह भी बताया था कि कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर जवानों के लिए हालात कितने मुश्किल थे। वहां सिर्फ दुश्मन का सामना करना ही चुनौती नहीं था, बल्कि मौसम, ऊंचाई और कठिन रास्ते भी सैनिकों की परीक्षा लेते थे। नाना के लिए सेना सिर्फ एक फिल्मी किरदार नहीं थी। फिल्मों में नाना पाटेकर ने कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन सेना के साथ उनका यह रिश्ता उनकी जिंदगी की उन कहानियों में शामिल है, जो उनके स्टारडम से कहीं अलग नजर आती हैं। एक अभिनेता के तौर पर कैमरे के सामने अपनी पूरी ताकत लगाने वाले नाना ने एक वक्त ऐसा भी देखा, जब उन्होंने कैमरे और फिल्मों की दुनिया से दूर जाकर जवानों के बीच समय बिताना चुना।
