लोन लेने की सोच रहे हैं? तो सिर्फ अच्छा CIBIL स्कोर देखकर खुश मत होइए, क्योंकि बैंक सिर्फ स्कोर नहीं देखते। कई लोग मानते हैं कि अगर उनका क्रेडिट स्कोर 750 से ऊपर है तो लोन पक्का मिल जाएगा, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। बैंक आपकी पूरी फाइनेंशियल हेल्थ का विश्लेषण करते हैं यानी आपकी इनकम, खर्च और पुराने कर्ज के आधार पर यह तय करते हैं कि आप नया लोन संभाल पाएंगे या नहीं। इसके लिए बैंक तीन जरूरी रेश्यो (Financial Ratios) चेक करते हैं। तो अगर आप ये सोच रहे हैं कि बैंक आपको सिबिल स्कोर के बदले में लोन दे देगा तो आइए आपको बताते हैं कि सिबिल स्कोर तगड़ा होने के बावजूद भी किन तीन चीजों की वजह से आपका लोन रिजेक्ट हो सकता है?
Debt-to-Income Ratio (DTI)
यह रेश्यो बताता है कि आपकी हर महीने की आमदनी में से कितना हिस्सा ईएमआई में चला जाता है। अगर आपकी इनकम ₹1 लाख है और ₹25,000 ईएमआई में जा रहा है, तो आपका DTI 25% होगा। जितना कम DTI, बैंक के लिए उतना बेहतर, क्योंकि इससे साफ होता है कि आपके पास अन्य खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा बचता है। अगर DTI बहुत ज्यादा हुआ, तो बैंक को लगता है कि आपके पास नया लोन चुकाने की क्षमता नहीं है।
EMI-to-Net Monthly Income Ratio (EMI/NMI)
यह रेश्यो बताता है कि आपकी नेट सैलरी का कितना प्रतिशत हिस्सा मौजूदा और नए लोन की ईएमआई में जाएगा। बैंक चाहते हैं कि यह रेश्यो 50–55% से कम हो। अगर आपकी नेट इनकम ₹80,000 है और ईएमआई ₹48,000 बन रही है, तो EMI/NMI = 60% होगा, जो ज्यादा है। ऐसे में बैंक को लगता है कि आपकी आधी सैलरी ईएमआई में चली जाएगी और बाकी खर्च संभालना मुश्किल होगा।
Loan-to-Value Ratio (LTV)
यह रेश्यो खासकर होम लोन और कार लोन में देखा जाता है। यह बताता है कि आपकी प्रॉपर्टी या गाड़ी की कुल वैल्यू के मुकाबले बैंक कितना लोन दे रहा है। अगर ₹50 लाख के घर पर ₹40 लाख का लोन है, तो LTV = 80% होगा। बैंक चाहते हैं कि यह रेश्यो ज्यादा न हो, ताकि उनका रिस्क कम रहे।
अब बात करते हैं CIBIL स्कोर की, जो 300 से 900 के बीच होता है। यह आपकी क्रेडिट हिस्ट्री, पुराने लोन और बिल पेमेंट के आधार पर तय होता है। अगर आप समय पर EMI और कार्ड बिल चुकाते हैं, तो स्कोर बढ़ता है। लेकिन अगर पेमेंट लेट होती है, तो स्कोर गिर जाता है।
अच्छे CIBIL स्कोर के फायदे
लोन जल्दी अप्रूव होता है, ब्याज दर कम मिलती है, और बैंक प्री-अप्रूव्ड लोन ऑफर देते हैं।
खराब स्कोर के नुकसान
बैंक आपको हाई-रिस्क बॉरोअर मानते हैं, जिससे लोन में देरी होती है, ब्याज दरें बढ़ जाती हैं, और कई बार लोन रिजेक्ट भी हो जाता है। यहां तक कि कुछ इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे ग्राहकों से ज्यादा प्रीमियम भी वसूलती हैं।
आखिर बैंक चाहते क्या हैं?
बैंकों को वही ग्राहक पसंद हैं जो समय पर EMI भरते हैं, खर्च और इनकम का बैलेंस बनाए रखते हैं और कर्ज को जिम्मेदारी से संभालते हैं। अगर आपका DTI, EMI/NMI और LTV रेश्यो कंट्रोल में है और CIBIL स्कोर 750+ है, तो बैंक बिना झंझट के लोन मंजूर कर देता है।