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क्रूड के शतक से लड़खड़ाए एशियाई बाजार, निफ्टी भी नर्वस, गैप डाउन ओपनिंग के संकेत

क्रूड ऑयल के फिर से 100 डॉलर को छूने और लगातार 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच में बन रहने की वजह से एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली है। वहीं, गिफ्ट निफ्टी भी निफ्टी और सेंसेक्स में गैप डाउन ओपनिंग के संकेत दे रहा है।

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शेयर बाजार में नरमी (इमेज क्रेडिट, कैन्वा)

Gift Nifty Global Share Markets Nifty Opening: वैश्विक बाजारों से मिल रहे संकेत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं। GIFT Nifty में गिरावट दिख रही है, जबकि एशियाई बाजार दबाव में हैं। उधर क्रूड 100 डॉलर के पार पहुंच गया है और अमेरिकी-यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी रही, जिससे निवेशकों की सतर्कता बढ़ी है।

क्या संकेत दे रहा गिफ्ट निफ्टी?

GIFT Nifty में कमजोरी दिख रही है और यह भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है। इंडेक्स करीब 198 अंक यानी 0.84% गिरकर 23,518 के आसपास ट्रेड करता दिखा, जो इसके पिछले बंद 23,717 से नीचे है। आम तौर पर GIFT Nifty की चाल से यह अंदाजा लगाया जाता है कि भारतीय बाजार किस दिशा में खुल सकते हैं, ऐसे में मौजूदा गिरावट से संकेत मिल रहा है कि निफ्टी और सेंसेक्स में आज कमजोर या गैप-डाउन शुरुआत देखने को मिल सकती है, खासकर तब जब अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी दबाव बना हुआ है।

क्रूड 100 डॉलर पार

कमोडिटी बाजार में शुक्रवार सुबह तेजी का रुख दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 0.63% बढ़कर 101.10 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि WTI क्रूड भी 0.56% चढ़कर 96.26 डॉलर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल में यह मजबूती सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण बनी हुई है। वहीं सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोना भी 0.69% की बढ़त के साथ 5,114 डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिख रहा है। कुल मिलाकर कमोडिटी बाजार में फिलहाल तेजी का माहौल है, खासकर क्रूड में मजबूती वैश्विक बाजारों और महंगाई की चिंता को बढ़ा रही है।

रुपये और डॉलर का क्या हाल?

करेंसी बाजार में हल्की मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। डॉलर इंडेक्स करीब 0.02% बढ़कर 99.74 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की मामूली मजबूती को दिखाता है। वहीं भारतीय मुद्रा रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है और USD/INR 0.15 रुपये यानी 0.16% बढ़कर 92.19 पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र में यह 92.36 के हाई और 92.06 के लो के बीच रहा। मजबूत डॉलर और वैश्विक अनिश्चितता के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है।

एशियाई बाजार लुढ़के

एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को कमजोरी का माहौल दिखा। जापान का Nikkei 225 करीब 663 अंक यानी 1.22% गिरकर 53,790 पर आ गया, जबकि दक्षिण कोरिया का KOSPI भी 1.27% टूटकर 5,512 पर कारोबार करता दिखा। हांगकांग का Hang Seng करीब 0.29% फिसलकर 25,642 पर रहा और ताइवान का Taiwan Weighted भी 0.47% गिरकर 33,424 पर आ गया। वहीं GIFT Nifty करीब 198 अंक यानी 0.84% गिरकर 23,518 पर ट्रेड करता दिखा, जो भारतीय बाजार के लिए कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है। हालांकि कुछ बाजारों में सीमित स्थिरता भी दिखी, जहां Straits Times हल्की बढ़त में रहा और Shanghai Composite लगभग सपाट कारोबार करता नजर आया।

अमेरिकी बाजारों में दबाव

अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को दबाव देखने को मिला। टेक शेयरों में बिकवाली के कारण Nasdaq 404 अंक यानी 1.78% गिरकर 22,311.98 पर बंद हुआ, जबकि व्यापक बाजार सूचकांक S&P 500 भी 103 अंक यानी 1.52% टूटकर 6,672.62 पर आ गया। बाजार में सतर्कता और मुनाफावसूली के चलते गिरावट देखने को मिली। हालांकि Dow Jones Futures में हल्की मजबूती रही और यह करीब 195 अंक यानी 0.42% चढ़कर 46,873 के आसपास ट्रेड करता दिखा, लेकिन टेक्निकल संकेत अभी भी कमजोर बने हुए हैं और साल 2026 की शुरुआत से अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन नकारात्मक बना हुआ है।

यूरोपीय बाजारों में कमजोरी

यूरोपीय शेयर बाजारों में भी गुरुवार को हल्की कमजोरी देखने को मिली। ब्रिटेन का FTSE 100 करीब 48 अंक यानी 0.47% गिरकर 10,305.15 पर बंद हुआ, जबकि फ्रांस का CAC 40 57 अंक यानी 0.72% टूटकर 7,984.44 पर आ गया। जर्मनी का DAX भी मामूली दबाव में रहा और 50 अंक यानी 0.21% फिसलकर 23,589.65 पर बंद हुआ। कुल मिलाकर यूरोपीय बाजारों में सतर्कता का माहौल रहा और प्रमुख इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टेक्निकल संकेतक अभी भी कमजोर रुख की ओर इशारा कर रहे हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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