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Insurance Claim Rejection: 6 फीसदी लोगों के इंश्योरेंस क्लेम हो जाते हैं रिजेक्ट, आप न करें ये गलतियां

Reason of Insurance Claim Rejection : ऑनलाइन इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म पॉलिसीबाजार ने ज इंडिंया हैप्पी विद हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम्स रिपोर्ट जारी की है। जिसमें यह बताया गया है कि 6 फीसदी रिजेक्ट क्लेम्स में से लगभग आधे का कारण पहले से मौजूद या उजागर नहीं हुई बीमारियों का खुलासा न करना था।

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इंश्योरेंस क्लेम रिपोर्ट

Insurance Claim Rejection Reason:बीमा जागरूकता के मौके पर ऑनलाइन इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म पॉलिसीबाजार ने अपनी नई रिपोर्ट जारी की है। जिसके अनुसार भारत में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम तेजी से बढ़ हैं। और उनका अप्रूवल रेट 94 फीसदी है। इसका मतलब यह है कि अधिकांश पॉलिसीधारकों के क्लेम स्वीकार हो जाते है। इसके अतिरिक्त, 86 फीसदी लोग अपने क्लेम के अनुभव से खुश हैं। जबकि 6 फीसदी अस्वीकृत क्लेम की अगर बात करें तो रिसर्च से यह पता चलता है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड का उपयोग करने से क्लेम अप्रूवल रेट को बढ़ाया जा सकता है।

सबसे ज्यादा किस मीडियम से क्लेम अप्रूवल

रिपोर्ट –इज इंडिंया हैप्पी विद हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम्स? के अनुसार 94 फीसदी ने ने बताया कि उनके हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम स्वीकृत हो गए हैं, विशेष रूप से, ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से शुरू किए गए क्लेम्स के लिए यह संख्या 97 फीसदी तक है। अध्ययन से पता चलता है कि 86% ग्राहक अपने हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के अनुभव से खुश हैं, और 40% ग्राहक अत्यधिक संतुष्ट हैं। इस संतुष्टि का मुख्य कारण कैशलेस क्लेम, ऑनलाइन सर्विस और न्यूनतम कागजी कार्रवाई है।

6 फीसदी क्यों है रिजेक्ट

6 फीसदी रिजेक्ट क्लेम्स में से लगभग आधे का कारण पहले से मौजूद या उजागर नहीं हुई बीमारियों का खुलासा न करना था। यह प्रोडक्ट सरलीकरण के साथ-साथ इंडस्ट्री में जागरूकता और पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता को सामने लाता है ताकि उपभोक्ता और इंडस्ट्री के बीच बेहतर समझ हो।

कैशलेस बनाम रीइंबर्समेंट क्लेम

अध्ययन में पाया गया कि जहां कैशलेस क्लेम कम रिजेक्शन दर के कारण पसंदीदा तरीका है। वहीं रीइंबर्समेंट क्लेम अक्सर तब मांगे जाते हैं जब पसंदीदा हेल्थकेयर प्रोवाइडर के नेटवर्क में नहीं होते हैं। हालांकि, इलाज के लिए पहले भुगतान करना कई लोगों के लिए एक चुनौती बनी हुई है, लगभग 70% रीइबर्समेंट दावेदार फॉर्मल या इनफॉर्मल लोन के माध्यम से वित्तीय सहायता चाहते हैं। या फिर अपनी जमा पूंजी का इस्तेमाल करते हैं।

रिपोर्ट पर पॉलिसीबाजार के ज्वाइंट ग्रुप सीईओ, सरबवीर सिंह ने कहा कि क्लेम ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए, क्लेम समाधान और क्लेम आश्वासन जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से क्लेम के अनुभव में सुधार हमारे लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र रहा है। यह अध्ययन उपभोक्ताओं के क्लेम के अनुभव को और बेहतर बनाने के हमारे प्रयासों का विस्तार है। रिपोर्ट में 39 शहरों के 2,100 से अधिक लोगों का सर्वेक्षण किया गया है।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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