हर साल अप्रैल का महीना नौकरीपेशा लोगों के लिए उम्मीदों और बदलावों का संगम होता है। जहां एक ओर लोग इंक्रीमेंट या बोनस की राह देखते हैं, वहीं दूसरी ओर नया वित्त वर्ष (Financial Year) शुरू होने के कारण सैलरी में भी बड़े बदलाव होते हैं। इस बार भी जब अप्रैल की सैलरी स्लिप (Salary Slip) कर्मचारियों के हाथ में आई, तो कई लोगों को झटका लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि कई कर्मचारियों की कुल सैलरी (Gross Salary) तो वही रही या उसमें बढ़ोतरी हुई, लेकिन उनके बैंक खाते में आने वाली रकम (In-hand Salary) पिछले महीने के मुकाबले कम हो गई है। आखिर अप्रैल में सैलरी क्यों कम आई और इससे बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं आइए जानते हैं?
क्यों कम आई सैलरी?
अप्रैल की सैलरी कम होने की सबसे बड़ी वजह टैक्स डिडक्शन (TDS) है। नया वित्त वर्ष शुरू होते ही कंपनियां अपने कर्मचारियों से निवेश की नई घोषणाएं (Investment Declarations) मांगती हैं। अगर कोई कर्मचारी समय पर यह घोषणा नहीं करता है कि वह पुराने टैक्स स्लैब में रहना चाहता है या नए में, या फिर उसने भविष्य के लिए कितना निवेश (जैसे LIC, 80C आदि) करने का प्लान बनाया है, तो कंपनी नियमानुसार अधिकतम टैक्स काटना शुरू कर देती है। इसके अलावा, पिछले साल के मुकाबले इस साल टैक्स स्लैब या नियमों में हुए सूक्ष्म बदलावों का असर भी अप्रैल की पहली सैलरी स्लिप पर साफ दिखाई देता है।
सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव का असर
जायदातर कंपनियों ने सरकार और नए वेज कोड के मुताबिक इस साल कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर दोबारा डिजाइन किया है। इसमें एचआरए (HRA), कन्वेंस अलाउंस और स्पेशल अलाउंस जैसे घटकों में बदलाव किया जाता है। अगर किसी कर्मचारी का कोई टैक्स-फ्री अलाउंस कम होकर टैक्सेबल हिस्से में चला गया है, तो उसका सीधा असर इन-हैंड सैलरी पर पड़ता है। साथ ही, प्रोविडेंट फंड (PF) के योगदान में होने वाली वृद्धि भी हाथों में आने वाली नकदी को कम कर देती है। कर्मचारी अक्सर ग्रॉस सैलरी को ही अपनी असली कमाई मान लेते हैं, लेकिन अप्रैल की सैलरी स्लिप उन्हें असलियत का अहसास कराती है कि टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद घर ले जाने वाली रकम कितनी कम हो सकती है।
कैसे बचें इस झटके से?
विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल की सैलरी स्लिप में हुए इस 'धोखे' से बचने के लिए कर्मचारियों को वित्त वर्ष की शुरुआत में ही सावधानी बरतनी चाहिए। सबसे पहले अपनी कंपनी के एचआर पोर्टल पर जाकर सही टैक्स रिजीम (Tax Regime) का चुनाव करें। यदि आप निवेश के जरिए टैक्स बचाना चाहते हैं, तो अपनी निवेश योजना की जानकारी समय पर साझा करें। अपनी सैलरी स्लिप के हर कॉम्पोनेंट को ध्यान से पढ़ें ताकि आपको पता चल सके कि कटौती कहां और क्यों हुई है। यह छोटा सा कदम न केवल आपकी इन-हैंड सैलरी को बेहतर बना सकता है, बल्कि साल के अंत में टैक्स के बोझ को भी कम कर सकता है।
