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Apollo Tyres Success Story: परेशान होकर 1 रुपये में बेचना चाहते थे कंपनी, आज 31 हजार करोड़ के मालिक

Apollo Tyres Success Story: अपोलो टायर्स लिमिटेड एक अंतरराष्ट्रीय टायर निर्माता और भारत में अग्रणी टायर ब्रांड है। कंपनी की कुल छह विनिर्माण इकाइयाँ हैं। जिनमें भारत में 4 और नीदरलैंड और हंगरी में 1-1 शामिल हैं। भारत का पांचवां और वैश्विक स्तर पर सातवां केंद्र आंध्र प्रदेश में बन रहा है। अपोलो टायर्स ब्रांड की 5,000 से अधिक अधिकृत डीलरशिप हैं।

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अपोलो टायर के चेयरमैन ओंकार सिंह कंवर।

Photo : Times Now Digital

Apollo Tyres Success Story: हम आपको एक ऐसी कंपनी के बारे में बता रहे हैं जिसके मालिक 1977 में आज की हजारों करोड़ की कंपनी घाटे की वजह से सिर्फ 1 रुपये में बेचना चाहते थे। उस कंपनी का नाम अपोलो टायर है। जिसका आज मार्केट कैप 31 हजार करोड़ रुपये है। यह राष्ट्रीयकरण वाले दौर की बात है जब कोका-कोला और आईबीएम जैसी कई कंपनियाँ संकट में पड़ गईं और अपोलो भी इससे अछूती नहीं रही। अपोलो फैक्टरी यूनियन भी चाहती थी कि कंपनी का राष्ट्रीयकरण हो। लेकिन अपोलो टायर फाउंडर रौनक सिंह ने केस लड़ा और ऐसा नही होने दिया।

क्यों 1 रुपये में बेचना चाहते थे Apollo Tyres

वह कंपनी को बहाल करने में कामयाब रहे लेकिन भारी घाटे में चले गए ऐसे में उन्होंने एक बार इसे अपने बेटे को 1 रुपये में बेचने की बात कही थी। आज उनके बेटे ओंकार सिंह कंवर अपने पिता की विरासत को संभाल रहे हैं और वह कंपनी के चेयरमैन हैं। ओंकार सिंह कंवर, जब कंपनी घाटे में थी तब वह इसे हिंदुस्तान लीवर और नेस्ले जैसी कंपनी बनाना चाहते थे। अपोलो टायर्स लिमिटेड की स्थापना 1972 में हुई थी और आज यह टायरों के निर्माण और बिक्री के बिजनेस में एक विश्वसनीय नाम बना हुआ है। आज कंपनी का मार्केट कैप 31099 करोड़ रुपये है।

Apollo Tyres Product

अपोलो टायर्स ब्रांड की 5,000 से अधिक अधिकृत डीलरशिप हैं।

एसयूवी टायर से बाइक तक के टायर बनाती है Apollo Tyres

अपोलो टायर्स लिमिटेड एक अंतरराष्ट्रीय टायर निर्माता और भारत में अग्रणी टायर ब्रांड है। कंपनी की कुल छह विनिर्माण इकाइयाँ हैं। जिनमें भारत में 4 और नीदरलैंड और हंगरी में 1-1 शामिल हैं। भारत का पांचवां और वैश्विक स्तर पर सातवां केंद्र आंध्र प्रदेश में बन रहा है। अपोलो टायर्स ब्रांड की 5,000 से अधिक अधिकृत डीलरशिप हैं, जिनमें देश भर में 2,500 से अधिक विशिष्ट अपोलो टायर दुकानें शामिल हैं। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक अपोलो टायर अपने उत्पादों को अपने दो वैश्विक ब्रांडों अपोलो और व्रेडेस्टीन के तहत मार्केटिंग करती है कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो में यात्री कार, एसयूवी, एमयूवी, हल्के ट्रक, ट्रक-बस, दोपहिया, कृषि, औद्योगिक, विशेष, साइकिल और ऑफ-द-रोड टायर और रीट्रेडिंग सामग्री और टायर की पूरी सीरीज शामिल है। भारत के गुड़गांव में मुख्यालय वाली कंपनी का कारोबार 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और यह वैश्विक टॉप 20 टायर निर्माताओं में से एक है। अपोलो टायर्स को हाल ही में एशिया और यूरोप दोनों में 'काम करने के लिए सर्वश्रेष्ठ कंपनी' के रूप में मान्यता दी गई है

Apollo Tyres Chairman onkar singh kanwar family

बाई तरफ अपोलो टायर के फाउंडर रौनक सिंह, दाई तरफ ओंकार सिंह कंवर और उनके बेटे अपोलो टायर के एमडी नीरज कंवर।

अपोलो टायर्स के MD ओंकार सिंह कंवर के बारे में

ओंकार सिंह कंवर अपोलो टायर्स के को-फाउंडर रौनक सिंह के सबसे बड़े बेटे हैं। पाकिस्तान के सियालकोट में पैदा हुए ओंकार सिंह, भारत और पाकिस्तान के विभाजन के दौरान परिवार के साथ भारत आ गए थे। बंटवारे में अपना सबकुछ पाकिस्तान में छोड़कर हिंदुस्तान पहुंचे ओंकार सिंह के परिवार के लिए शुरुआत करना इतना आसान नहीं था। उनके पिता ने देश में पाइप का बिजनेस शुरू किया। स्कूली पढ़ाई करने के बाद ओंकार कंवर हायर स्टडी के लिए अमेरिका चले गए। अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी करने के बाद, ओंकार सिंह 1964 में भारत वापस लौटे और अपने फैमिली बिजनेस में शामिल हो गए। कुछ सालों के बाद, परिवार ने व्यवसाय का विस्तार करने और टायर निर्माण में उतरने का फैसला लिया और अपोलो टायर्स की नींव रखी गई।

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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