Crude Oil Import: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कच्चा तेल लेकर आ रहा एक विदेशी ध्वज वाला टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है। जहाज निगरानी से जुड़े आंकड़ों और उद्योग सूत्रों के अनुसार, यह टैंकर सऊदी अरब से करीब 10 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत आया है। ऐसे समय में जब क्षेत्र में संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, इस टैंकर का सुरक्षित पहुंचना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
सऊदी अरब से तीन मार्च को हुआ था रवाना
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक लाइबेरिया के ध्वज वाला यह टैंकर ‘शेनलांग’ तीन मार्च को सऊदी अरब के रास तानुरा बंदरगाह से कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ था। यह जहाज कई दिनों की समुद्री यात्रा के बाद बुधवार शाम मुंबई बंदरगाह पहुंचा। जहाज के पहुंचते ही बंदरगाह पर उससे तेल उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह तेल भारत की रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण है और इससे आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
होर्मुज के पास बंद हो गया था जहाज का सिग्नल
जहाज की यात्रा के दौरान एक दिलचस्प स्थिति भी सामने आई। जहाज ने नौ मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अपना अंतिम सिग्नल भेजा था। इसके बाद कुछ समय के लिए जहाज की स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) बंद हो गई थी। माना जा रहा है कि इसी दौरान जहाज ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया। बाद में जहाज का सिग्नल फिर से सक्रिय हुआ और वह जहाज निगरानी प्रणाली पर दिखाई देने लगा। सुरक्षा कारणों से कई बार जहाज इस तरह अस्थायी रूप से अपने सिग्नल बंद कर देते हैं।
इराकी तेल लेकर दूसरा बड़ा टैंकर भी भारत की ओर
इस बीच एक और बड़ा तेल टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है। यह भारतीय ध्वज वाला बहुत बड़ा टैंकर है जो करीब 20 लाख बैरल इराकी कच्चा तेल लेकर भारतीय समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। यह जहाज ओडिशा के पारादीप बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है। पारादीप में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की बड़ी रिफाइनरी स्थित है, जहां इस तेल को उतारा जाएगा। यह टैंकर भी ऐसे समय में भारत पहुंच रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
भारत की तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसमें भी एक बड़ा भाग पश्चिम एशिया के देशों से आता है। इन देशों से आने वाला अधिकांश तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही भारत पहुंचता है। इसलिए इस जलमार्ग की सुरक्षा और यहां से जहाजों की निर्बाध आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर इस रास्ते में किसी तरह की बाधा आती है तो इसका सीधा असर भारत की तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
भारत ने ईरान से साधा संपर्क
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाई है। सरकार ने ईरान के अधिकारियों से संपर्क साधा है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस बीच कुछ अपुष्ट खबरें भी सामने आई हैं जिनमें कहा गया है कि ईरान ने भारतीय ध्वज वाले जहाजों को जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ता देने पर सहमति जताई है।
विदेश मंत्रालय ने नहीं की पुष्टि
हालांकि भारत सरकार की ओर से इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि आखिरी बातचीत में दोनों पक्षों ने समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि फिलहाल इस बातचीत के बारे में अधिक जानकारी साझा करना उचित नहीं होगा।
28 भारतीय जहाजों के फंसे होने की जानकारी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पोत परिवहन मंत्रालय ने भी एक अहम जानकारी दी है। मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की स्थिति के कारण 28 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। सरकार स्थिति पर करीबी निगरानी बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाने की तैयारी भी कर रही है।
ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम घटनाक्रम
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे तनावपूर्ण माहौल में तेल लेकर आने वाले टैंकरों का सुरक्षित भारत पहुंचना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे न सिर्फ भारत की ऊर्जा आपूर्ति बनी रहती है बल्कि बाजार में अनिश्चितता भी कम होती है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर भारत सहित पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
