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दिल्ली में गैस सिलेंडरों के लिए मची हाय-तौबा, जानें 20 फीसदी सप्लाई में पहले किसे मिलेगा LPG सिलेंडर?

ग्लोबल सप्लाई में उथल-पुथल के कारण प्रशासन ने '20 फीसदी सप्लाई रूल' लागू कर दिया है, जिसके तहत अब मांग के मुकाबले बेहद कम सिलेंडर उपलब्ध होंगे। इस किल्लत के बीच सरकार ने एक प्रायोरिटी लिस्ट (Priority List) तैयार की है, ताकि सीमित स्टॉक का सही इस्तेमाल हो सके। आइए जानते हैं कि इस संकट की घड़ी में सबसे पहले किसे सिलेंडर दिया जाएगा?

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lpg cylinder crisis

देश की राजधानी दिल्ली इस समय एक गंभीर एलपीजी (LPG) संकट के दौर से गुजर रही है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन बाधित होने का सीधा असर अब दिल्लीवासियों की रसोई पर दिखने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गैस की सप्लाई पर कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब दिल्ली में मांग के मुकाबले केवल 20 फीसदी एलपीजी सिलेंडरों की ही सप्लाई की जाएगी। सप्लाई में आई इस भारी कटौती ने आम जनता से लेकर व्यापारिक संस्थानों तक के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। शहर में सिलेंडरों की भारी किल्लत के बीच अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि सीमित स्टॉक में से पहले किसे सिलेंडर दिया जाएगा।

पहले किसे मिलेगा सिलेंडर?

गैस की इस भारी कमी को मैनेज करने के लिए सरकार ने एक 'प्रायोरिटी लिस्ट' (Priority List) यानी प्राथमिकता सूची तैयार की है। इस योजना के तहत सबसे पहले स्वास्थ्य सेवाओं को रखा गया है। दिल्ली के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटरों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी ताकि मरीजों की देखभाल और खान-पान में कोई बाधा न आए। इसके बाद दूसरा नंबर शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कैंटीनों का आता है। स्कूलों और कॉलेजों में चल रही मेस और कैंटीन को दूसरी प्राथमिकता पर रखा गया है, ताकि छात्रों को भोजन की समस्या न हो। इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जरूरतें पूरी होने के बाद ही अन्य क्षेत्रों पर विचार किया जाएगा।

इनको कम मिलेगा स्टॉक

व्यावसायिक क्षेत्र, विशेष रूप से रेस्टोरेंट और होटलों के लिए यह संकट बड़ा चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बड़े रेस्टोरेंट्स और कमर्शियल संस्थानों को केवल उनकी अनिवार्य जरूरत का एक छोटा हिस्सा ही मिल पाएगा। हालांकि, इन्हें प्राथमिकता सूची में रखा गया है, लेकिन सप्लाई कैप (Supply Cap) की वजह से इन्हें भी कटौती का सामना करना पड़ेगा। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमित संसाधनों का उपयोग सबसे पहले उन जगहों पर हो जहां जीवन और स्वास्थ्य का सवाल जुड़ा है। आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि 20 फीसदी सप्लाई का मतलब है कि बुकिंग के बाद सिलेंडर मिलने में लगने वाला समय अब काफी बढ़ सकता है।

इस संकट की मुख्य वजह वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आई भारी तेजी और सप्लाई रूट में मची उथल-पुथल है। ईरान-इजराइल तनाव के कारण समुद्र के रास्ते होने वाली डिलीवरी प्रभावित हुई है, जिससे स्टॉक की भारी कमी हो गई है। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में जहां रोजाना हजारों सिलेंडरों की खपत होती है, वहां सप्लाई में 80 फीसदी की कटौती एक बड़े आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर रही है। तेल कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि वे सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और कोशिश की जा रही है कि कालाबाजारी न हो और जरूरतमंदों को ही पहले सिलेंडर मिले।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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